जींद। जिले में चार महीने से एडीसी का पद खाली है। करीब चार महीने पहले जींद में एडीसी रहे सतेंद्र दुहन का तबादला हुआ था और इसके बाद जिले में कोई एडीसी नहीं आया है। इसका असर डी-प्लान के तहत मिले दस करोड़ 58 लाख रुपये के विकास कार्यों पर पड़ेगा। यदि जल्द ही एडीसी की नियुक्ति नहीं हुई तो मार्च में यह राशि लैप्स हो जाएगी।
डी-प्लान के तहत मिली राशि का बजट अलग से डीआरडीए द्वारा खर्च किया जाता है। इसके बजट का खर्च करने की प्रशासनिक मंजूरी एडीसी द्वारा दी जाती है, लेकिन जिले में एडीसी नहीं है तो इसकी मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
गलियों के निर्माण में खर्च होती है राशि
वैसे तो डी प्लान की राशि कहीं भी प्रशासनिक मंजूरी से खर्च हो सकती है, लेकिन इससे मुख्य रूप से गलियों के निर्माण का काम किया जाता है। ऐसे में यह राशि खर्च नहीं हो पाने से कई विकास कार्य रुके हुए हैं। तत्कालीन एडीसी का तबादला होने के करीब एक महीना बाद ही नवंबर महीने में यह राशि जिले को मिल गई थी। एडीसी नहीं होने के कारण राशि खर्च नहीं हो पा रही है।
एडीसी का पद खाली होने पर सरकार की ओर से एडीसी लगाया जाता है। वरिष्ठ एचसीएस या आईएएस को ही चार्ज दिया जा सकता है। यह सरकार के स्तर पर ही होता है। ऐसे में विभाग में इसके लिए बात की है। जल्द ही व्यवस्था होने की उम्मीद है। - डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।