जुलाना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोगों को सुविधा देने के बजाय रेफरल केंद्र बना हुआ है। रोजाना ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सोया हुआ है।
जुलाना निवासी गर्भवती को मंगलवार को जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। वहां पर मौजूद नर्स ने नॉर्मल डिलिवरी की बात कहकर महिला को अस्पताल बुलाया। बुधवार दोपहर बाद जब महिला को प्रसव पीड़ा हुई तो उसे जुलाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, मगर चिकित्सकों ने उसे वहां से पीजीआई रोहतक ले जाने के लिए कहा गया। इस पर परिजनों ने मना कर दिया। कुछ देर बाद महिला की नॉर्मल डिलिवरी हो गई, मगर कोई भी नर्स उसे संभालने के लिए नहीं आई।
वार्ड नंबर नौ निवासी राजबाला ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही की है। मौके पर दो नर्स थीं, लेकिन दोनों ने उनकी बहू रिंकू को वहीं पर छोड़कर बाहर निकल गईं। मौके पर कोई भी महिला चिकित्सक नहीं थी। जब चिकित्सक उनकी बहू को पीजीआई रेफर करने लगे तो उन्होंने मना कर दिया। कुछ देर बाद उनकी बहू की नॉर्मल डिलिवरी हुई, जोकि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। वह इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करेगी।
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पहले भी घट चुकी हैं घटनाएं
बुढ़ाखेड़ा लाठर गांव निवासी विजेंद्र ने बताया था कि 4 अक्तूबर को उनकी बेटी तमन्ना घर आई हुई थी। शुक्रवार को सुबह उसे प्रसव पीड़ा होने पर डिलिवरी के लिए जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए तो चिकित्सकों ने उसके रक्त का लेवल कम बताकर रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। जिस एंबुलेंस में ले जा रहे थे उसी में एक अन्य मरीज और उसके दो साथियों को बैठा दिया था। एंबुलेंस के लाखनमाजरा के पास पहुंचने पर महिला की नॉर्मल डिलिवरी हुई थी। महिला को संभालने के लिए एंबुलेंस में कोई महिला मेडिकल स्टाफ और ईएमटी नहीं था। इससे महिला को काफी परेशानियों से होकर गुजरना पड़ा था। महिला के परिजनों ने अस्पताल और एंबुलेंस प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हुए थे।
अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। अगर शिकायत आती है तो इसकी विभागीय जांच करवाई जाएगी। -डाॅ. गोपाल गोयल, सीएमओ, जींद।
24जेएनडी18: जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का फोटो। संवाद