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Jind News: एमटीपी नियमों की अवहेलना पर चार निजी अस्पतालों के गर्भपात लाइसेंस रद्द

Wed, 06 Aug 2025 12:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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05जेएनडी44: डॉ. सुमन कोहली। - फोटो : संवाद
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जींद। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) नियमों की अवहेलना करने वाले चार निजी अस्पतालों के लाइसेंस स्वास्थ्य विभाग ने रद्द कर दिए हैं। पिछले दिनों सीएमओ के नेतृत्व में टीम ने शिकायत मिलने पर इन अस्पतालों की जांच की थी। इस दौरान कई नियमों की अवहेलना मिली। इसकी रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने शशि शर्मा अस्पताल समेत चार अस्पतालों पर छापे मारे।
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छापे में शशी शर्मा अस्पताल में 24 सप्ताह का गर्भपात करवाया पाया गया था। इसको देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग ने चार निजी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया है। इनमें जींद के दो निजी अस्पतालों का गर्भपात लाइसेंस दो माह के लिए, सफीदों के एक निजी अस्पताल का गर्भपात केंद्र का लाइसेंस दो माह के लिए व शशि शर्मा अस्पताल का लाइसेंस चार माह के लिए रद्द किया है।
नागरिक अस्पताल में सीएमओ डाॅ. सुमन कोहली की अध्यक्षता में जिलास्तरीय एमटीपी कमेटी की बैठक जून में हुई थी। इस बैठक में एमटीपी निरीक्षण टीम की ओर से प्राइवेट अस्पतालों की निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि निरीक्षण के दौरान जिला जींद के तीन प्राइवेट अस्पतालों व सफीदों के एक अस्पताल में एमटीपी नियमों के तहत कमियां पाई गई हैं।
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एमटीपी नियमों अनुसार यह जरूरी है कि अस्पताल के लेबर रूम में साफ-सफाई का होना बहुत जरूरी है। इन अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट नियमों के तहत प्रबंध नहीं है। लेबर रूम में पहले से प्रयोग किए गए हाथ में पहने जाने वाले ग्लव, प्रयोग की गई वॉयल, कुछ जंग लगे मेडिकल औजार लेबर रूम में मौजूद थे। जिससे मरीज को इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। अस्पताल के एडमिशन रजिस्टर व एमटीपी स्टॉक रजिस्टर में भी कमियां पाई थी।
शशि शर्मा अस्पताल पर केस हुआ था दर्ज
स्वास्थ्य विभाग ने बाल भवन रोड पर शशि शर्मा अस्पताल पर छापा मारा था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल को 20 सप्ताह तक के भ्रूण की गर्भपात करवाने की मंजूरी थी लेकिन अस्पताल के चिकित्सकों ने 24 सप्ताह से ज्यादा का गर्भपात करवाया जा रह था। साथ ही संबंधित परिवर के लोगों से पूछताछ की गई थी। परिवार ने इस मामले में स्पष्ट किया कि गर्भ में जो बच्चा था वह मृत था इसलिए उनकी पत्नी को ज्यादा परेशानी होने के कारण गर्भपात का निर्णय लिया था। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. अरविंद की शिकायत पर निजी अस्पताल की संचालिका डॉ. शशि शर्मा के खिलाफ मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 के तहत केस दर्ज किया था।
वर्जन
एमटीपी नियमों की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन्हीं नियमों की अवहेलना पर चार अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अस्पताल एमटीपी नियमों के तहत अपना रजिस्टर, रिकॉर्ड, स्टॉक को अपडेट रखें। लेबर रूम में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखते हुए बायो मेडिकल वेस्ट अनुसार वेस्ट को मैनेज करें। अगर नियमों की अवहलेना होती है तो सख्त विभागीय कार्रवाई में लाई जाएगी।
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डॉ. सुमन कोहली, सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल जींद।
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