जींद। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर जिलाभर के शिवालय पूरी तरह से सज गए हैं। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिरों में चल रही तैयारियों से वातावरण भी शिवमय हो गया है।
बुधवार को सुबह से ही बम भोले के जयघोष गूंजने लगेंगे और यह क्रम पूरे दिन जारी रहेगा। महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए मंदिरों की विशेष साज सज्जा की गई है। स्थानीय मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, इसके लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। इस दौरान शिवभक्त हरिद्वार से गंगा जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करेंगे।
श्रवण नक्षत्र, बुधादित्य, त्रिग्रही योग में भगवान शिव की पूजा करेंगे श्रद्धालु : इस बार महाशिवरात्रि पर्व पर श्रवण नक्षत्र, बुधादित्य, त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इन तीनों योगों का एक ही दिन पर बनना अद्भुत संयोग है। श्रवण नक्षत्र इस दिन सुबह से लेकर शाम 5:08 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसी दिन बुध, शनि और सूर्य तीनों कुंभ राशि में विराजमान होंगे। ऐसे में बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है।
यह दिन खासतौर पर भगवान शिव की पूजा के लिए होता है और इस दिन शिवलिंग की पूजा करने का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा-पाठ करने से भक्तों के जीवन में खुशहाली आती है और भगवान शिव की कृपा मिलती है। यह शुभ अवसर 26 फरवरी को सुबह 11:08 बजे से आरंभ होकर 27 फरवरी को सुबह 8:54 बजे तक रहेगा। इसके अलावा महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर में की जा सकती है। प्रथम प्रहर में भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया जा सकता है। दूसरे प्रहर में दही से अभिषेक, तीसरे प्रहर में शुद्ध देशी घी से अभिषेक और चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक किया जा सकता है। महाशिवरात्रि के दिन शिव स्तुति, शिव मंत्र, शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा, शिव तांडव, रुद्राष्टक, शिव पुराण और शिव आरती गाना अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं।
25जेएनडी18: महाशिवरात्रि पर्व को लेकर कावड़ लेकर गंतव्य की और जाता कावड़िया। संवाद