22जेएनडी35: श्रवण की मृत्यु के बाद श्रवण के माता पिता को संभालते हुए राजा दशरथ। स्त्रोत आयोजक
- फोटो : बौर क्षेत्र में कटान करती नदी।
नरवाना। श्री भारतीय कला केंद्र की ओर से हुडा ग्राउंड में रविवार रात भव्य रामलीला मंचन का शुभारंभ किया गया। पहले ही दिन मंचन में श्रद्धा और भक्ति भाव का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रवण कुमार का भावुक कर देने वाला प्रसंग मंचित किया। वहीं दर्शकों ने न केवल धार्मिक प्रसंगों का आनंद लिया बल्कि पहली बार लगी राम की रसोई का स्वाद भी चखा।
कलाकारों ने दिखाया कि किस प्रकार श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को कंधों पर बैठाकर तीर्थ यात्रा कराता है। यात्रा के दौरान माता-पिता को प्यास लगने पर वह सरयू नदी से पानी लेने गया। वहीं शिकार की तलाश में राजा दशरथ ने शब्द बाण चला दिया जो सीधे श्रवण कुमार को जा लगा। घायल श्रवण ने प्राण त्याग दिए। इस मार्मिक दृश्य से पूरा पंडाल भावुक हो उठा।
आगे दिखाया गया कि जब राजा दशरथ पानी लेकर अंधे माता-पिता के पास पहुंचे और सच्चाई बताई तो उन्होंने श्राप दिया कि जिस तरह वह अपने पुत्र के लिए तरस रहे हैं, वैसे ही एक दिन दशरथ भी अपने पुत्रों के लिए तरसेंगे। कार्यक्रम के मुख्यातिथि डाडली खेड़ा शनि पंचायत मंदिर से सिद्धेश्वर यति महाराज, नप चेयरपर्सन प्रतिनिधि लक्ष्मण मिर्धा और प्रो. रमेश रहे।
अतिथियों का स्वागत सरपरस्त ज्ञाना राम शर्मा, प्रधान कुलदीप सिंगला और मीडिया प्रभारी विनोद मंगला ने स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। लक्ष्मण मिर्धा ने कहा कि भारतीय कला केंद्र द्वारा की जा रही व्यवस्थाएं सराहनीय हैं और मंच पर कई नए कलाकार अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। इस बार रामलीला मंचन में दर्शकों के लिए विशेष पहल की गई। पहली बार हुडा ग्राउंड में राम की रसोई लगाई गई। इसका शुभारंभ बलराज गर्ग, रामअवतार बंसल और मोहन लाल गर्ग ने किया।
यहां दर्शकों को मात्र 10 रुपये में विभिन्न व्यंजन परोसे गए। आयोजकों ने बताया कि रसोई का उद्देश्य यह है कि लोग अल्पाहार का भी स्वाद ले सकें। मंच संचालन रामनिवास और राकेश ने किया।