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पुत्र कुपुत्र हो सकता है, माता कुमाता नहीं : पवन शर्मा

Wed, 01 Oct 2025 02:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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30जेएनडी18-माता वैष्णवी धाम में दुर्गा सप्तमी पर मां की पूजा करते हुए श्रद्धालु। स्रोत पुजारी
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जींद। पुजारी पवन शर्मा ने कहा कि परमात्मा न स्त्री है, न पुरुष है। जैसा जिसका भाव हो, उसे वैसा ही वह दीखता है। अतः जिस भी भाव से उनका भजन करोगे, उसी स्वरूप में उनकी प्राप्ति हो जाएगी। यह विचार उन्होंने माता वैष्णवी धाम में दुर्गा सप्तमी पर श्रद्धालुओं के समक्ष कहे। इस दौरान रघुनंदन शर्मा, महेंद्र मंगला, मिकिन अरोड़ा, पूर्ण गिरधर ने सपरिवार भगवती कालरात्रि की पूजा-अर्चना कर महायज्ञ में आहुति अर्पित की।
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आचार्य ने कहा कि प्रभु तक पहुंचने के लिए मातृ भाव सर्वाधिक सरल है। पुत्र चोर हो, व्यभिचारी अथवा जुआरी हो, अवज्ञाकारी हो, मां को कष्ट देने वाला हो, बुरे से बुरा हो लेकिन माता का स्नेह पुत्र के लिए किसी काल में भी कम नहीं होता। पुत्र कुपुत्र हो सकता है लेकिन माता कभी कुमाता नहीं हो सकती।
इस अवसर पर गोपाल कृष्ण माटा, अशोक आहुजा, गुलशन आहुजा, सुरेश कोचर, संजय आहुजा, कार्तिकेय शर्मा, विरेंद्र मेंहदीरत्ता, रविंद्र शर्मा, दिनेश शर्मा, तिलक भोला मौजूद रहे।
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