जींद। हरियाणा के दिल कहे जाने वाले जींद में बड़ा राजनीतिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी के बाद अब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर 11 साल 9 महीने बाद दूसरी बार 17 जुलाई को जींद पहुंचेंगे। वे रेलवे और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व लोकार्पण करेंगे।
जींद का राजनीतिक इतिहास देश के कई बड़े नेताओं के दौरों का साक्षी रहा है। आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 1952 में जींद आए थे। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी प्रधानमंत्री रहते हुए 1987 में जींद पहुंचे थे। अब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार जींद पहुंचकर इस ऐतिहासिक सूची में एक और राजनीतिक अध्याय जोड़ेंगे।
जींद केवल सत्ताधारी नेताओं के दौरों तक सीमित नहीं रहा बल्कि विपक्ष की राजनीति के दौरान भी राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं ने यहां जनसभाओं को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 साल नौ महीने और छह दिन बाद जींद के दौरे पर आ रहे हैं। इससे पहले 11 अक्तूबर 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान के प्रचार में रैली की थी।
पहले और अब में बदल गए राजनीतिक समीकरण
प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी साल 2014 में जींद आए थे। उस समय जिले में भाजपा को पांच में से केवल एक विधानसभा सीट पर जीत मिली थी। भाजपा से उम्मीदवार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता विधायक चुनी गई थीं। हालांकि प्रेमलता को अपने परिवार के प्रभाव के कारण जीत मिली थी। साल 2024 के विधानसभा चुनाव में जींद में पांच में से चार सीटों पर भाजपा का कब्जा है।
मार्च 1987 में राजीव गांधी भी पहुंचे थे जींद
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी मार्च 1987 में अचानक नरवाना के गांव भिखेवाला पहुंचे थे। खास बात यह रही कि वह खुद जोंगा जीप चलाकर गांव तक आए थे। उनके इस दौरे ने क्षेत्र में काफी चर्चा बटोरी थी।
1952 में जींद आए थे जवाहरलाल नेहरू
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1952 में रेलगाड़ी से नरवाना जाते समय जींद जंक्शन पर उतरे थे। यहां कुछ समय के लिए उनका ठहराव हुआ था।
इंदिरा गांधी ने अर्जुन स्टेडियम में जनसभा को किया था संबोधित
इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहते हुए जींद नहीं आईं। हालांकि, वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद उन्होंने जींद के अर्जुन स्टेडियम में जनसभा को संबोधित किया था। भाषण के दौरान इंदिरा गांधी ने पार्टी की हार की जिम्मेदारी खुद ली तो जनसभा में मौजूद महिलाएं भावुक होकर रोने लगी थीं। इसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने दोबारा बड़ी जीत हासिल की और इंदिरा गांधी फिर से देश की प्रधानमंत्री बनीं।