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प्रदेश में बड़े पैमाने पर चल रहा माइनिंग घोटाला : दीपेंद्र हुड्डा

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पूर्व सांसद, दीपेंद्र हुड्डा। - फोटो : Jind
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प्रदेश में अवैध खनन और ओवरलोडिंग का खुला खेल चल रहा है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर माइनिंग घोटाला हो रहा है। यमुना पर लूट मची है और ईमानदार अपनी जेबें भर रहे हैं। यमुना से अरावली तक के घोटाले राजनैतिक संरक्षण के बिना संभव नहीं हैं। यह बात कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने शोक जताने के दौरान पालवां गांव में कही।
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पत्रकारों से बातचीत में दीपेंद्र ने कहा कि वे पहले से इस कहते आ रहे हैं कि गठबंधन सरकार घोटालों से घिरी है। यह बात प्रदेश के लोगों को पता चल चुकी है। घोटाले, धांधली, रिश्वतखोरी, फर्जीवाड़ा, पेपर लीक, अपराधियों को संरक्षण का पर्याय बनी मौजूदा गठबंधन सरकार ईमानदारी का चोला ओढ़कर लोगों के साथ विश्वासघात कर रही है। उन्होंने मांग की कि सभी घोटालों की निष्पक्ष जांच हो। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से इनकी जांच करवाई जाए। दीपेंद्र ने कहा कि यह कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने पहले ही टिप्पणी की है। उसके बाद विधानसभा में पेश कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के खजाने को माइनिंग माफिया 1476 करोड़ रुपये का चूना लगा चुके हैं। साथ ही यह भी साफ है कि ठेकेदारों के प्रति सरकार का रवैया ढुलमुल है। कई जगह खनन माफियाओं ने अवैध खनन करके नदी का बहाव तक मोड़ दिया है।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए कहा है कि खदान और खनिज विकास एवं पुनर्वास निधि में 49 करोड़ 30 लाख रुपये नहीं जमा करवाने वाले 48 ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। टेंडर राशि जमा नहीं करवाने वाले 84 में से 69 ठेकेदारों के खिलाफ भी कोई कदम नहीं उठाया गया। इन ठेकेदारों पर बकाया 347 करोड़ रुपये नहीं वसूले गए। खनन माफियाओं ने आवंटित स्थानों की बजाय मनमाने तरीके से दूसरी जगहों पर खनन किया। इससे साफ है कि बेलगाम खनन माफियाओं को राजनैतिक संरक्षण मिल रहा है। अखबारों में लगातार छपी खबरों में कहा गया कि हजारों करोड़ रुपये के ओवरलोडिंग घोटाले की काली कमाई का बंटवारा अधिकारी व मंत्री से लेकर ऊपर तक जाता है। अब तो सरकार के नए मंत्री भी मान रहे हैं कि पूरा घोटाला सरकारी संरक्षण में चल रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि धान घोटाला, अवैध खनन घोटाला, परिवहन विभाग का किलोमीटर स्कीम घोटाला, बिजली विभाग में मीटर खरीद घोटाला, हजारों करोड़ रुपये की काली कमाई वाला ओवरलोडिंग घोटाला सरकार की नाक के नीचे हो रहा है।
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