जींद। हरियाणा सरकार ने प्रदेश के मधुमक्खी पालकों के लिए अहम फैसला लिया है। सरकार ने भावांतर भरपाई योजना के तहत शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है।
डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि देश में मधुमक्खी पालन तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और हनी मिशन जैसी योजनाओं के कारण शहद का उत्पादन और निर्यात दोनों बढ़े हैं और भारतीय शहद दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।
उन्होंने बताया कि शहद का न्यूनतम संरक्षित मूल्य तय होने से मधुमक्खी पालकों की आय सुरक्षित होगी और वे बिना डर के अपना काम आगे बढ़ा सकेंगे। यह कदम प्रदेश में मधुमक्खी पालन को और मजबूत करेगा।
डीसी ने मधुमक्खी पालकों से कहा कि वे योजना का लाभ लेने के लिए मधुक्रांति पोर्टल और भावांतर भरपाई योजना पोर्टल पर अपना पंजीकरण जरूर करवाएं। उन्होंने बताया कि सत्यापन की अंतिम तिथि 30 जून 2026 तय की गई है। हर मधुमक्खी बक्से पर परिवार पहचान पत्र के अंतिम चार अंक और बक्सा नंबर लिखना अनिवार्य होगा। सत्यापन की प्रक्रिया जिला स्तर पर पूरी की जाएगी।