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आंगनबाड़ी वर्कर्स ने पुतला फूंककर किया रोष प्रकट

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आंगनबाड़ी वर्कर्स ने का पुतला फूंक प्रदर्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। मांगोें को लेकर शुक्रवार को 14वें दिन भी आंगनबाड़ी वर्कर्स का धरना जारी रहा। आंगनबाड़ी वर्कर्स ने ग्रीन बेल्ट से चलकर लघु सचिवालय तक प्रदर्शन करने के बाद डीपीओ ऊषा को ज्ञापन सौंपा और पुतला फूंककर रोष प्रकट किया।
जिला प्रधान भुला देवी ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण हर वर्ग दुखी है। सभी अपनी मांगोें को पूरी करवाने के लिए सड़क पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है। दूसरी तरफ आंगनबाड़ी वर्कर्स को मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। फरवरी 2018 में आंगनबाड़ी वर्कर्स ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। उस समय सरकार ने उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया गया। यही कारण है कि धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। यूनियन जिला सचिव सुमन ने कहा कि 23 फरवरी को आंगनबाड़ी वर्कर्स प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के मंत्री व विधायकों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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आंगनबाड़ी कर्मचारियों की मुख्य मांगे
सुमन ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर्स को कुशल और अर्ध कुशल श्रेणी में शामिल किया जाए। ईएसआई और पीएफ सहित महंगाई भत्ता दिया जाए। कर्मचारियों को सर्दियों व गर्मियों में अवकाश प्रदान किया जाए। गर्मी व सर्दियों में आंगनबाड़ी केंद्रोें के समय में बदलाव किया जाए। कर्मचारियों की पदोन्नति केवल वरिष्ठता के आधार पर की जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया शहरों, कस्बों व गांवों में क्रमश: पंाच हजार, तीन हजार व 750 रुपये लागू किया जाए। कर्मचारियों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार के सदस्यों को कम से कम तीन लाख रुपये सहायता राशि के रूप में दिया जाए। कर्मचारियों की पेंशन शुरू की जाए। कर्मचारियों की बकाया राशि तुरंत प्रभाव से कर्मचारियों को प्रदान की जाए। सुमन ने कहा कि अगर सरकार ने कर्मचारियों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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