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मानसून की बेरूखी से किसानों के अरमानों पर फिर रहा पानी, महज 68 हजार हैक्टयर में हो सकी है धान की रोपाई

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद। मानसून की बेरुखी और सिंचाई विभाग के कुप्रबंधन के कारण जिले के किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। धान की रोपाई का सीजन चल रहा है, लेकिन किसानों को न तो नहरों से पानी मिल रहा है और न ही बारिश हो रही है। इससे रोपाई प्रभावित हो रही है। जिले में करीब सवा लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। इस बार कृषि विभाग ने एक लाख 30 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन अब तक महज 68 हजार हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है।
जिले के अधिकतर क्षेत्रों में ट्यूबवेल भी डीजल इंजन पर आधारित हैं। ऐसे में यदि किसान ट्यूबवेल से सिंचाई करते हैं तो यह काफी महंगा पड़ेगा। इसके चलते किसान सिर्फ मानसून की बारिश का ही इंतजार कर रहे हैं। जिन किसानों ने बारिश की आस में धान की रोपाई की है, उन्हें अब फसल को जिंदा रखने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
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बहुत खर्चीला है डीजल इंजन
डीजल इंजन से धान की फसल लगाना बहुत खर्चीला है। बिरौली गांव निवासी किसान जगत सिंह ने बताया कि धान के लिए खेत तैयार करने के लिए उसे पूरी तरह पानी से भरना पड़ता है। इसके लिए करीब 20 लीटर डीजल लगेगा। करीब 1400 रुपये का डीजल फूंक कर धान की फसल लगेगी। धान की फसल में पानी भरा रखना पड़ता है। इसके बाद प्रतिदिन तीन से चार लीटर डीजल लगेगा। जो एक दिन का खर्च 200 से 250 रुपये होगा। ऐसे में किसान के लिए डीजल इंजन के सहारे फसल लगाना संभव नहीं है।
42 दिन के बाद आठ दिन मिलता है नहरी पानी
नई व्यवस्था के तहत नहरों में 42 दिन के बाद महज आठ दिन के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। इसके तहत सुंदर ब्रांच नहर में 22 जुलाई को पानी छोड़ा जाएगा, जबकि हांसी ब्रांच नहर में 30 जुलाई को पानी छोड़ा जाएगा। जिले की अधिकतर सिंचाई व्यवस्था इन दो नहरों पर ही टिकी है। वहीं नरवाना से निकलने वाली भाखड़ा नहर में पानी पूरा साल चलता है।
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पांच साल के बारिश के आंकड़े एमएम में
साल जून जुलाई अगस्त
2011 109 69 107
2012 -- 50 92.2
2013 69.7 112 177.5
2014 10 61 42
2015 82 105.5 177.5
2016 40 143 100
2017 143 65 69.5
2018 69 -- --
सरकार की व्यवस्था के अनुसार 42 दिन में ही नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। जींद में कुल 1150 क्यूसिक पानी सप्लाई होता है। पिछले क्षेत्रों में बारिश होने के चलते यमुना ब्रांच में जलस्तर बढ़ा है। ऐसे में जब नहरों में पानी पहुंचेगा तो इसकी मात्रा अधिक होगी। किसानों को राहत मिल सकती है।
-राजीव कुमार, तार बाबू, सिंचाई विभाग।
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