अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
बारिश के मौसम में पौधारोपण कर जिले में हरियाली लाई जाएगी। इस वर्ष के मानसून सत्र में जिले में आठ लाख पौधे लगाने का टारगेट जिला प्रशासन का है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए प्रशासन किसानों की सहायता लेगा और किसानों को लगभग छह लाख पांच हजार पौधे पर्यावरण सुरक्षा में सहयोग के लिए लगाने होंगे।
डीसी अमित खत्री ने कहा कि पर्यावरण को संतुलित करने के लिए अधिकाधिक पौधारोपण करना जरूरी है। जितने भी पौधे बारिश के मौसम में रोपित किए जाएंगे वह मुरझाने नहीं पाएं और सभी पेड़ बनें। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को संजीदा होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पौधारोपण करने मात्र से लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो जाती, जब तक पौधा पेड़ नहीं बनता तब तक उसमें पानी देना, उसे सुरक्षित करना जैसे कार्यों को उत्तरदायी दृष्टिकोण लेकर पूरा करना होगा। डीसी ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को सचेत किया कि वह जन साधारण को भी पौधारोपण के प्रति सचेत करें। डीसी ने कहा कि जिले में वन विभाग की नर्सरियों में पांच लाख 34 हजार पौधे तैयार हैं। यह पौधे कलमी सफेदा के होंगे। उन्होंने दोहराया कि जिले में पौधारोपण के दौरान पौधों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
‘हर गांव-पेड़ों की छांव’ कार्यक्रम के तहत 100 गांवों में लगाए जाएंगे दस हजार पौधे
डीसी ने कहा कि ‘हर गांव पेड़ों की छांव’ कार्यक्रम के तहत जिले के 100 गांवों में दस हजार पौधे लगाए जाने हैं। ग्राम पंचायतों को यह पौधे फ्री में उपलब्ध करवाए जाएंगे। वन विभाग ने पंचायतों के सहयोग से पंचायती जमीन पर 27 हजार सात सौ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हिसार-कैथल नैशनल हाईवे पर जींद की सीमा में 50 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा नहरों और सड़कों पर नौ हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसी क्रम में नहर और सड़कों पर विभाग द्वारा 12 हजार एक सौ पौधे लगाने का लक्ष्य है। शहरी क्षेत्र में सड़कों के साथ ग्रीन बेल्ट विकसित की जानी है। ग्रीन बेल्टों में 5500 पौधे रोपित करने का लक्ष्य है। विभिन्न सरकारी कार्यालयों, संस्थानों में डेढ़ लाख पौधे फ्री में लगाए जाएंगे। इसके अलावा अच्छी किस्म के पौधे अनुदान पर भी एक रुपया प्रति पौधा के हिसाब से वितरित करने का कार्यक्रम है।