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ऑन लाइन रजिट्रेशन करवाने के बाद भी नहीं बिका बाजरा

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ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद भी नहीं बिका बाजरा
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अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। बाजरे का सरकारी रेट बेशक 1950 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया हो, लेकिन किसानों को इसका फायदा नहीं हो रहा है। किसानों को अब भी अपना बाजरा औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। जिन किसानों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया है उनका बाजारा भी डिश कलर कह कर नहीं खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि बाजरा क्वालिटी बेहतर है, लेकिन खरीद एजेंसी डिश कलर कहकर नहीं खरीद रही है। कई किसानों ने गांव में जब कर्मचारी गए तो बाजरा रजिस्ट्रेशन के लिए नाम लिखवाया था, लेकिन उनका नाम नहीं मिल रहा है।
किसान बारूराम जुलानी, रमेश, लाभ, सोमवीर, जयबीर ने कहा कि अपनी फसल, अपना ब्योरा पोर्टल किसानों के लिए परेशानी बन गया है। मंडी में फसल आते ही सरकार को खरीदनी चाहिए। पहले फसल का रजिस्ट्रेशन करवाओ फिर उसको ढूंढो। किसान खेत में फसल की बिजाई, कटाई करे या ई-दिशा केंद्र का चक्कर काटता रहे। ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस तरह से किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार का यह फैसला पूरी तरह से किसान विरोधी है। जो भी फसल मंडी के फड़ पर आती है उसको खरीदना चाहिए न नियमों का हवाला देकर उसको खरीदने से मना किया जाए। उन्होंने कहा कि फसल का डेढ़ गुणा मूल्य किए जाने का दावा केंद्र, प्रदेश के मंत्री, विधायक प्रचार कर रहे थे। आज जो प्रचार कर रहे थे उन्हें मंडियों में आकर किसानों का बाजरा, पीआर धान बिकवाना चाहिए। सरकारी रेट पर बाजरा न बिकने पर सस्ते भाव पर 1250 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक बाजरा बेचना पड़ रहा है।
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मार्केट कमेटी सचिव जोगिंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के नियमानुसार जिस किसान ने बाजरा पोर्टल पर दर्ज करवाया है उसका बाजरा सरकारी भाव पर खरीद जाएगा। बाजरा की प्राइवेट खरीद भी हो रही है। जो सरकारी नियमों के अनुसार बाजरा है उसको अगर नहीं खरीदा जा रहा है तो इसको लेकर संबंधित खरीद एजेंसी से बात करेंगे।
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पीआर धान को खरीदने नहीं आ रही एजेंसी
उचाना में चौथे दिन भी पीआर धान की खरीद नहीं हुई। इससे किसानों में प्रशासन के खिलाफ रोष है। चार दिनों से किसान मंडी में अपनी फसल को लेकर आए हैं, लेकिन फसल की खरीद नहीं हो रही है। इसको लेकर मार्केट कमेटी सचिव से मिलकर आढ़ती, किसान मांग कर चुके हैं, लेकिन अब भी धान की खरीद को खरीदने के लिए एजेंसी नहीं आ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार ने एक तारीख से धान की सरकार खरीद का ऐलान किया है, लेकिन फसल को खरीदने के लिए जो एजेंसी अधिकृत की गई है वो नहीं आ रही है। किसानों को मंडी में रुककर ही अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। खरीद एजेंसी हैफेड के डीएम कर्ण लोहान ने कहा कि खरीद की जाएगी। फिलहाल फसल में नमी की मात्रा अधिक है।
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