नरवाना में खरीदा गया 28 रुपये का प्रेग्नेंसी जांच कार्ड, कंडेला में सबसे कम चार रुपये चार पैसे की स्ट्रिप
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला द्वारा आरटीआई में मिले जवाबों के आधार पर प्रदेश भर के स्वास्थ्य विभाग में अलग-अलग सामान की खरीद में हुई गड़बड़ी की आंच जींद के नागरिक अस्पताल तक भी पहुंच रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2015 में जींद में प्रेग्नेंसी जांच कार्ड व स्ट्रिप खरीदी गई। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार यह कार्ड सामान्यतौर पर पांच से छह रुपये का मिल जाना चाहिए, लेकिन इसमें जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। नरवाना सब डिविजनल हॉस्पिटल (एसडीएच) में एक हजार प्रेग्नेंसी कार्ड 28 रुपये प्रति कार्ड की दर से खरीदे गए। बहरहाल यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं पूरा रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक द्वारा तलब किया गया है। रिकार्ड को एमएस डॉ. प्रेम गुप्ता चंडीगढ़ मुख्यालय लेकर जाएंगे।
नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार 2015 में ही अन्य स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में भी खरीद की गई, लेकिन इनके रेट नरवाना अस्पताल के मुकाबले काफी कम रहे। इससे स्वास्थ्य विभाग में फैले भ्रष्टाचार की पुष्टी हो रही है।
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यूं समझें भ्रष्टाचार के मकड़जाल को
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पता है कि प्रेग्नेंसी कार्ड या स्ट्रिप की कीमत दो रुपये से लेकर छह रुपये प्रति पीस होनी चाहिए। इसके बावजूद जींद के नागरिक अस्पताल में 2014-15 में चार हजार प्रेग्नेंसी कार्ड दस रुपये नौ पैसे प्रति पीस खरीदा गया। इसके लिए 43600 रुपये का भुगतान किया गया। 2015-16 में दो बार प्रेग्नेंसी कार्ड खरीदे गए और दोनों बार अलग-अलग रेट से भुगतान हुआ। 300 कार्ड के लिए दस रुपये 85 पैसे प्रति कार्ड के हिसाब से 3255 रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा दूसरी बार 8700 कार्ड पांच रुपये 49 पैसे प्रति कार्ड खरीदे गए। इसके लिए 47763 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं जिस कार्यकाल का मामला सामने आया है, उस दौरान जींद के नागरिक अस्पताल में 1800 कार्ड दस रुपये नौ पैसे प्रति यूनिट खरीदी गई। इसके लिए कुल 10900 रुपये का भुगतान किया गया। वैसे 2014-15 में तीन बार कार्ड खरीदे गए हैं। इसमें एक बार दस रुपये नौ पैसे, दूसरी बार दस रुपये आठ पैसे व तीसरी बार फिर दस रुपये आठ पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदारी हुई। सवाल उठ रहा है इतने समय में कार्ड के रेट में अधिक बदलाव कैसे आ सकता है।
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नरवाना में भ्रष्टाचार की सभी हदें पार
खरीद के मामले में नरवाना का नागरिक अस्पताल सबसे अधिक घेरे में आ रहा है। यहां वर्ष 2014 के दौरान कुल पांच बार, 2015 में आठ बार व 2016 में छह बार पे्रग्नेंसी कार्ड की खरीद हुई। इस दौरान जिला का सबसे अधिक रेट नरवाना में ही रहा। 2014 में चार बार छह रुपये प्रति कार्ड व एक बार दस रुपये प्रति कार्ड के हिसाब से खरीद की गई है। वहीं 2015 में 24 मार्च को एक हजार कार्ड खरीदे गए। यह कार्ड प्रति यूनिट 28 रुपये के हिसाब से खरीदे गए। इसके लिए 28000 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं दूसरी बार 23 रुपये प्रति कार्ड के हिसाब से 100 कार्ड खरीदे गए। चार बार 21.85 पैसे के हिसाब से 100 कार्ड, दो बार 18 रुपये प्रति कार्ड के हिसाब से 600-600 कार्ड खरीदे गए। सीएचसी उझाना में 2015 में 1200 कार्ड छह रुपये प्रति कार्ड के हिसाब से खरीदे गए। 2016 में एक हजार कार्ड सात रुपये व 100 कार्ड साढ़े छह रुपये प्रति कार्ड खरीदे गए हैं। सीएसची उचाना में छह रुपये प्रति कार्ड के हिसाब से खरीद हुई है।
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कंडेला को मिला सबसे सस्ता सामान
एक ओर जहां नरवाना में प्रेग्नेंसी कार्ड 28 रुपये प्रति पीस तक खरीदे गए हैं तो कंडेला गांव स्थित सीएचसी में महज चार रुपये में स्ट्रिप की खरीद हुई है। कंडेला सीएचसी में 2014 में 50 स्ट्रिप चार रुपये प्रति स्ट्रिप के हिसाब से खरीदे गए। 2015 में 100 स्ट्रिप चार रुपये चार पैसे के हिसाब से खरीदे गए।
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प्रेग्नेंसी स्ट्रिप व कार्ड में अंतर
चिकित्सकों के अनुसार प्रेग्नेंसी स्ट्रिप व कार्ड दोनों ही प्रेग्नेंसी की जांच के लिए प्रयोग किए जाते हैं। दोनों का काम बराबर है, लेकिन स्ट्रिप की बजाय कार्ड महंगा होता है। प्रेग्नेंसी स्ट्रिप की बजाय कार्ड के परिणाम पर ज्यादा भरोसा होता है।
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मुख्यालय भेजा रिकार्ड
यह मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सुबह सात बजे ही इसके लिए गाड़ी का इंतजाम करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसके बाद सुबह दस बजे तीन-चार बोरों में भर कर खरीद का पूरा रिकार्ड व बिल स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी एचआर 03एन 9828 में भर कर विभाग के कर्मचारी इसे मुख्यालय ले गए।
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जांच के लिए अस्पताल पहुंचे सीआईडी के अधिकारी
मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार सुबह सीआईडी के कुछ लोग सिविल सर्जन ऑफिस पहुंचे थे। इन्होंने जांच के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाए हैं। हालांकि अभी इसकी जांच सीआईडी करेगी या नहीं, यह तय नहीं है।
वर्जन
यह मामला मेरे कार्यभार संभालने से पहले का है। इसके लिए मुख्यालय से रिकार्ड मांगा गया है, जो भेज दिया। विभाग के अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं। जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।
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भ्रष्टाचार नहीं होगा सहन
एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे प्रदेश के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने अमर उजाला को बताया कि यह मामला संज्ञान में आ गया है। प्रदेश सरकार किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार को सहन नहीं कर सकती। इसके लिए विधानसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी पीएसी से जांच करवाई जाएगी। यदि कोई भी भ्रष्टाचार में शामिल मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।