सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन पर बिजाई कर किसानोें ने सरकार को दी चुनौैती
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। उचित मुआवजे की मांग को लेकर बिशनपुरा गांव में धरना दे रहे अनूपगढ, बिशनपुरा, असरफगढ़ और बिरोली गांव के किसान अब आक्रामक मुद्रा में आ गए हैं। शुक्रवार को किसानों ने सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन पर गेहूं की बिजाई करते हुए सरकार को सीधी चुनौती दे डाली। इससे बाईपास का काम अधर में लटकता नजर आ रहा है।
दरअसल इन गांवों के किसानों का कहना है इनके आगे के गांवों और पीछे के गांवों में अधिक मुआवजा दिया है, जबकि उनके गांवों में महज 12 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया है। इसको लेकर किसान भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में 39 दिन से धरने पर बैठे हैं। बिरोली गांव निवासी किसान सुरेश की के खेत से अधिग्रहीत की गई जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर गेहूं की बिजाई की गई। धरने पर भारतीय किसान संघ तोशाम के अध्यक्ष पवन लक्ष्मणपुरा ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि सभी नेता सत्ता में आने के बाद केवल किसानों को लूटने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने भी पिछले तीन साल में किसान हित का एक भी कम नहीं किया। जिला महामंत्री महिपाल सिंह ने कहा कि इस मामले को लेकर किसान संघ बड़ा आंदोलन करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पराली खरीदने की बात कह रही है, लेकिन किसानों की बाजरे और धान की फसल तक बिक नहीं रही है। इससे साफ है कि सरकार सिर्फ किसानों को गुमराह करने का काम कर रही है। धरने पर राजकुमार कृष्ण, नवाब सिंह, अजमेर सिंह रामविलास खर्ब, सुखा सिंह, कर्ण सिंह, टीटू, गुरदेव संधु, रामकुमार, हवासिंह, रतन सिंह, राजल, विकास, सीताराम, रोहताश, राजेश, बलबीर व कर्णसिंह मौजूद रहे।
किसानों ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
बाईपास के विरोध में किसानों के आंदोलन से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इससे बाईपास का निर्माण रूक गया है। दरअसल एनएचएआई द्वारा किनाना गांव से पंजाब सीमा तक चार लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जा रहा है। इसमें करीब 11 किलोमीटर का जींद का बाईपास भी है। किसानों के आंदोलन के कारण बाईपास का काम धीमा चल रहा है।
झांझ के किसान भी विरोध में
वहीं झांझ व आसपास के गांवों के किसान भी मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगा चुके हैं। ये किसान भी आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को बाईपास के लिए एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना होगा।