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शिवरात्री कल, 36 घंटे की कावड़ लाने के लिए हरिद्वार रवाना हुए शिव भक्त
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सुबह चार बजे से होगा शिवलिंग पर जलाभिषेक, मंदिरों में खास तैयारी

अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
श्रावण मास की महाशिवरात्री का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसके लिए जहां शिव भक्तों में जोश है, वहीं प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं ने भी खास तैयारी कर रही है। शास्त्रों के अनुसार सावन महीने में भगवान शिव की पूजा से हर मनोकामना पूर्ण होती है। शिवरात्री पर जलाभिषेक के लिए शिव भक्त मंगलवार रात और बुधवार सुबह हरिद्वार के लिए रवाना हुआ। 36 घंटे में हरिद्वार से गंगाजल लाकर उससे भगवान शिव को जलाभिषेक किया जाता है।
इसको लेकर शिव चौक स्थित शिव मंदिर, रानी तालाब स्थित भूतेश्वर तीर्थ के हरकैलाश मंदिर, सफीदों के नागक्षेत्र सहित तमाम मंदिरों में खास तैयारियों चल रही है। जैसे-जैस शिवरात्री का दिन नजदीक आता जा रहा है, हरिद्वार से लौटने वाले शिव भक्तों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। काफी लोग हरिद्वार से पैदल चल कर गंगाजल लाते हैं और शिव रात्री के दिन भगवान शिव को जलाभिषेक करते हैं।
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कावड़ पर तिरंगा भी
इस बार कावड़ यात्रा में अनोखा प्रयोग देखने को मिल रहा है। पैदल कावड़ियों के साथ-साथ डाक कवाड़ के साथ भी शिव भक्त गंगाजल के साथ देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को भी साथ लेकर चल रहेष हैं। कावड़ लाने वाले युवाओं ने बताया कि इससे आस्था के साथ देशभक्ति का भी प्रचार हो रहा है।


कान फोड़ शोर राहत
इस बार प्रशासन द्वारा कांवड़ यात्रा के वाहनों पर डीजे की लगाई गई रोक का काफी असर दिख रहा है। हालांकि कुछ वाहनों पर अब भी डीजे बजाया जा रहा है।


प्रशासन ने भी किए खास इंतजाम
महा शिवरात्रि पर्व को ध्यान में रखते हुए जींद पुलिस ने कावड़ियों के लिए पुखता प्रबंध किए हैं। हरिद्वार से पानीपत के रास्ते जींद तक तथा जींद से आगे हिसार व अन्य अपने अपने गंतव्य की और जाने वाले मार्गों पर कावड़ियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शहर में दिशा सूचक बोर्ड लगाए गए हैं। एसएसपी शशांक आंनद के अनुसार शिवरात्रि पर्व पर कावड़ियों व अन्य भगतों की मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिरों और कावंड शिविरों के आसपास खास सुरक्षा के इंतजाम किए गए है।
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चार पहर में हो पूजा
सावन माह की शिवरात्री का खास महत्व है। इस मौसम में प्रकृति भी विकसित होती है। ऐसे में इस दौरान गंगाजल के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक का खास महत्व है। इस दौरान सुबह सात बजे, 11 बजे, एक बजे और फिर सुबह चार बजे पूजा का विशेष महत्व है। इससे चारों पहरों में पूजा होती है।
देवी दयाल शास्त्री

फोटो नंबर
19जेएनडी14: अपने गंतव्य की ओर जाते कांवड़िए।
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