निपटान योजना चलाने के बाद भी 22 हजार ने नहीं भरा 600 करोड़ बकाया बिजली बिल
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जींद उपचुनाव के चलते जिले में बिजली बिल निपटान योजना 19 दिन बाद समाप्त हुई। अन्य जिलों में इससे पहले ही योजना को समाप्त कर दिया गया था। जिले में इस योजना का लाभ लेने के 126793 डिफाल्टर पात्र उपभोक्ता थे। इनमें से 19 फरवरी तक 104812 लोगों ने इसका लाभ उठाया और निगम को 50 करोड़ रुपये का राजस्व दिया। निगम ने इन लोगों का योजना के तहत 931 करोड़ रुपये का बिजली बिल माफ किया है। अब यह योजना निगम ने बंद कर दी है।
इतने दिन तक योजना चलाने के बाद भी जिले में अभी भी 22 हजार डिफाल्टर उपभोक्ता बचे हैं। इनको 600 करोड़ रुपये बिल के रूप में जमा करने हैं। अब इन डिफाल्टर उपभोक्ताओं को इस निपटान योजना का लाभ नहीं मिलेगा। निगम ने डिफाल्टर उपभोक्ताओं पर शिकंजा भी कसना शुरू कर दिया है। अब इन उपभोक्ताओं पर निगम की दोहरी मार पड़ेगी। एक तो इन सभी के मकानों से बिजली निगम मीटर उखाड़ दिए जाएंगे, दूसरी तरफ इनसे बकाया बिल भी वसूला जाएगा। निपटान योजना के तहत नाममात्र पैसे में ही यह लोग अपने माथे से डिफाल्टरी का दाग धो सकते थे, लेकिन अब इनको मोटी रकम जमा करवानी पड़ेगी। इसके अतिरिक्त घर में बिजली की बत्ती गुल होगी। निगम ने जिले में मीटर उखाड़ने के लिए 48 टीमें तैनात की हैं। इन टीमों ने अब तक 11500 लोगों के घरों से मीटर उखाड़ने का काम किया है। इनमें से लगभग 3000 लोगों ने निपटान योजना के चलते ही अपना बकाया जमा भी करवाकर दोबारा से मीटर लगवा लिया है। बिजली निगम की गांव-गांव जाकर डिफाल्टर उपभोक्ताओं को बिल माफी योजना की जानकारी देने के बाद जिले में यह बड़ी सफलता है।
बिजली निगम की बिल निपटान योजना 19 फरवरी तक थी। अब इस योजना का किसी भी बचे हुए डिफाल्टर उपभोक्ता को लाभ नहीं मिलेगा। अब जिले में बचे हुए डिफाल्टर उपभोक्ताओं के मीटर उखाड़े जाएंगे। यह योजना पूरे प्रदेश से जींद में 19 दिन ज्यादा चली है। अब निगम के किसी भी डिफाल्टर उपभोक्ता के घर पर मीटर नहीं बचेगा।
--श्यामबीर सैनी, एसई बिजली निगम जींद।