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जिला भर के राष्ट्रीयकृत बैंकों में रही हड़ताल, करीब 75 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ प्रभावित, आज भी रहेगी हड़ताल

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद।
दो प्रतिशत वेतन वृद्धि के विरोध में जिले के राष्ट्रीयकृत बैंकों के करीब दो हजार कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस दौरान जिले की 115 शाखाओं में करीब 75 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक बंद होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं कर्मचारियों ने वीरवार को भी हड़ताल का ऐलान किया है। हालांकि निजी क्षेत्र के बैंकों में कामकाज सामान्य रहा।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के जिला प्रधान आजाद सिंह मलिक ने बताया कि बैंक कर्मचारियों को महज दो प्रतिशत वेतन वृद्धि की पेशकश की जा रही है। यह वेतन वृद्धि बहुत कम है जिससे बैंक कर्मचारी नाखुश हैं। इन लोगों ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को पूरी तरह से सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए और वेतन वृद्धि के लिए नियम बनाए जाएं, जिससे नियमित रूप से इसका लाभ मिलता रहे। इसको लेकर बैंक कर्मचारी सुबह सफीदों गेट स्थित एसबीआई की शाखा के बाहर एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद बैंक कर्मचारियों ने बाजार में और रानी तालाब के चारों ओर प्रदर्शन किया। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि सरकार बैंक कर्मचारियों का शोषण कर रही है।
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ओबीसी के बाहर हुआ हंगामा
कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान रानी तालाब स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) के बाहर काफी हंगामा हुआ। यहां बैंक के शाखा प्रबंधक को पुलिस बुलानी पड़ी। दरअसल ओबीसी का स्टाफ हड़ताल पर होने के बावजूद शाखा प्रबंधक व कुछ अधिकारी बैंक में डटे रहे और काम करते रहे। इस पर कर्मचारी यूनियन ने विरोध जताते हुए कहा कि या तो वे लोग घर चले जाएं या फिर बैंक का शटर बंद कर काम करें। इस पर अधिकारियों ने उनकी कोई भी बात नहीं मानी। ऐसे में बैंक कर्मचारी यूनियन ने बैंक के बाहर ही अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ देर के बाद यहां पुलिस को बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में भी कर्मचारी नारेबाजी करते रहे।
एटीएम में भी आई दिक्कत
हड़ताल के चलते जिले की कई एटीएम में भी कैश की कमी खली। हालांकि कुछ बैंकों की एटीएम से कैश निकलता रहा। दरअसल एटीएम में कैश डालने की दो व्यवस्थाएं हैं। पहली व्यवस्था के तहत बैंक अधिकारी ही एटीएम को रिफिल करते हैं और दूसरी के तहत एटीएम को रिफिल करने का काम एजेंसी को दिया गया है। ऐसे में एजेंसी द्वारा रिफिल होने वाली कुछ एटीएम चालू रहीं, लेकिन अधिकतर सरकारी बैंकों की एटीएम ठप्प रहीं। इससे लोगों को कैश लेने के लिए एटीएम दर एटीएम भटकना पड़ा।
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कर्मचारियों की मांग साफ है, महज दो प्रतिशत वेतन वृद्धि मंजूर नहीं है। पिछली वेतन समीक्षा में 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि की गई थी। यह वेतन वृद्धि 2012 से 2017 के लिए थी। अब बैंकर्स महज दो प्रतिशत वेतन वृद्धि की पेशकश कर रहे हैं। यह सही नहीं है। बैंक कर्मचारियों ने पिछले दो-तीन साल में जन-धन, नोटबंदी मुद्रा और अटल पेंशन योजना समेत सरकार की प्रमुख योजनाओं को लागू करने के लिए दिन-रात काम किया। इसके बावजूद उन्हें वेतन वृद्धि का पूरा लाभ नहीं दिया जा रहा है। बैंक अपने घाटे का रोना रो रहे हैं, यह एनपीए के एवज में किए गए प्रावधान के कारण है जिससे बैंकों को नुकसान हुआ। इसके लिए कोई बैंक कर्मचारी जिम्मेदार नहीं है।
-आजाद सिंह मलिक, प्रधान, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस।
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