अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
15 अगस्त तक सड़कों को लावारिस पशु मुक्त करने के प्रदेश सरकार के फरमान से अधिकारी हड़बड़ी में हैं। इसके लिए अस्थायी नंदीशाला तो बना दी गई, लेकिन यहां बदइंतजामी के कारण अब गायें मर रही हैं। गोसेवकों की मानें तो बुधवार रात को अस्थायी नंदीशाला में चार गायों की मौत हो गई। हालांकि, प्रशासन तीन गायों की मौत की पुष्टि कर रहा है और मौसम में बदलाव को गायों की मौत का कारण मान रहा है।
आनन-फानन में प्रशासन ने गायों को स्थायी नंदीशाला में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रदेश सरकार ने आदेश के बाद जिला प्रशासन ने तीन दिन पहले जयंती देवी मंदिर के पास अस्थायी नंदीशाला बनाकर यहां गोवंश को रोकने का काम शुरू किया। इसके लिए रात भर अभियान चलाया गया। एडीसी धीरेंद्र खड़गटा भी रात भर अभियान में शामिल रहे। इसके अगले ही दिन यहां व्यवस्थाओं की पोल खुलने लगी। दो दिन पहले हुई बारिश के बाद स्थिति और भी बदतर हो गई। अस्थायी नंदीशाला में हुई दलदल यहां रोकी गई गायों के लिए परेशानी का सबब बन गई।
गायों पर हमला कर रहे सांड
अस्थायी नंदीशाला में रोकी गई गायों में वयस्क, बछड़े और बूढ़ी गायें शामिल हैं। बछड़े-बछड़ियों और बूढ़ी गायों को वयस्क गायों और सांडों से खतरा बना हुआ है। वहीं, प्रशासन ने काले सांडों को भी नंदीशाला में गायों के साथ छोड़ दिया है। अब ये काले सांड बूढ़ी गायों और बछड़े-बछड़ियों को घायल कर रहे हैं।
नंदीशाला में चल भी नहीं पा रहीं गायें
अस्थायी नंदीशाला की हालत सबके सामने है। यहां जेसीबी भी नहीं चल पा रही है। ऐसे में गायें कैसे चल सकती हैं। प्रशासन ने बिना इंतजाम किए गायों को यहां बंद कर दिया है। इस कारण गायें मर रही हैं।
प्रदीप गर्ग
चारे और पानी तक की व्यवस्था नहीं
गायों के लिए नहीं चारे और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। चार दिन हो गए हैं, लेकिन गायों को कुछ भी नहीं मिला है। ऐसे में गायों की मौत हो रही है। प्रशासन ने बिना इंतजाम किए गायों को यहां छोड़ा है। बछड़ों और गायों के लिए अलग-अलग व्यवस्था हो और काले सांडों को अलग रखा जाना चाहिए।
कन्हैया, विकलांग गोशाला
क्या हो व्यवस्था
प्रशासन स्वयं स्वीकार कर रहा है कि अस्थायी नंदीशाला में करीब दो हजार गायें और बछड़े हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार, एक वयस्क गाय और सांड को प्रतिदिन करीब 20 लीटर पानी चाहिए। करीब दस किलोग्राम सूखा चारा और तीन से चार किलोग्राम हरा चारा चाहिए। वहीं, तीन साल से छोटे बछड़ों को प्रतिदिन करीब पांच से छह लीटर पानी और दो से तीन किलोग्राम चारा चाहिए। ऐसे में दो हजार गायों के लिए 150 से 200 क्विंटल चारा चाहिए। जबकि, प्रशासन के पास इस प्रकार की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, वीरवार को सात ट्राली चारे की आई हैं। पानी के लिए एक पतली सी नाली बनाई गई है, जिसमें पानी कम और गारा ज्यादा है। इस कारण यहां गायें ठीक से पानी भी नहीं पी रही हैं।
गोभक्तों और प्रशासन में तकरार
जयंती देवी मंदिर के पास जब कुछ गोभक्तों ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए तो यहां मौजूद पशुपालन विभाग के अधिकारियों से उनकी बहस भी हो गई। इस दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने आरोप लगाए कि गोशालाओं की ओर से ही गायें सड़कों पर छोड़ी जा रही हैं।
तीन गायों की हुई है मौत
यहां तीन गायों की मौत हुई है। यह मृत्यु दर सामान्य है। अधिक उम्र के पशुओं की मौसम में बदलाव के कारण भी मौत हो जाती है। अधिक संख्या होने के कारण बछड़ों और वयस्क गायों को अलग किया जा रहा है। वहीं, काले सांडों के लिए भी अलग से व्यवस्था की जा रही है। जो गायें बीमार हैं, उनका इलाज किया जा रहा है।
डॉ. रणबीर सिंह मलिक, उप पशुपालन निदेशक
गोवंश की संख्या अधिक होने के कारण कुछ दिक्कत हुई है। इसके लिए यहां से गायों को शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। चारे की भी व्यवस्था करवा दी गई है। गायों को अलग-अलग करने की व्यवस्था भी की जा रही है।
अमित खत्री, डीसी
सरकार के फरमान पर हड़बड़ी में अफसर, बदइंतजामी से चार गायों की मौत
अस्थायी नंदीशाला में अव्यवस्था, एक सांड सहित दो बछड़ियों की हालत गंभीर
सरकार की ओर से 15 अगस्त से पहले सड़कों को लावारिस पशु मुक्त करने के आदेश