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एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराने लगी व्यवस्था

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एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराने लगी व्यवस्था
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों द्वारा 27 अगस्त से शुरू की गई हड़ताल का सबसे अधिक असर जिला भर में टीबी के मरीजों पर पड़ रहा है। जिलाभर में टीबी के 1345 मरीज पंजीकृत हैं, जो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर प्रतिदिन टीबी की दवा ले रहे हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अब मरीजों को पिछले चार दिन से दवाई नहीं मिल रही है। इससे इनको काफी परेशानी हो रही हैं। कुछ मरीजों का तो कोर्स पूरा होने वाला था, लेकिन अब उन्हें दोबारा कोर्स शुरू करने पड़ेगा।
गौरतलब है कि टीबी के मरीजों को प्रतिदिन नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर दवाई लेनी पड़ती है। टीबी का यह पूरा काम एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। अब एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों द्वारा हड़ताल करने से पीएचसी व उप स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की दवा नहीं पहुंच रही हैं। हालांकि नागरिक अस्पताल स्थित टीबी अस्पताल के प्रभारी डॉ. जितेंद्र कुमार का दावा है कि टीबी के मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही है।
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पत्र भेजकर पूरा किया काम
हालांकि स्वास्थ्य विभाग विभाग ने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पत्र भेजकर उनके अधीन आने वाले स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की दवा दिलवाने का काम सुचारू रखने के आदेश दिए हैं, लेकिन यह आदेश महज कागजी साबित हो रहे हैं।
व्यापक रहा असर
जिला में करीब 500 एमपीएचडब्ल्यू, 145 महिला कर्मचारियों में से 42 हड़ताल पर हैं। 28 महिला सुरवाइजर में से 10 हड़ताल पर हैं। इसी प्रकार मलेरिया में 140 में से 31 हड़ताल पर हैं और 127 पुरुष कर्मचारियों में से 125 हड़ताल पर हैं। दो कर्मचारी छुट्टी पर चल रहे हैं। इससे व्यापक स्तर पर काम प्रभावित हो रहा है।
जन्म-मृत्यु का काम प्रभावित
एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों की हड़ताल के चलते ग्रामीण क्षेत्र में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का काम भी प्रभावित हुआ है। नियमानुसार जन्म-मृत्यु होने पर क्षेत्र का बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कर्मी अपनी पीएचसी पर एक सूचना फार्म भेजता है। इसके आधार पर ही जन्म-मृत्यु का पंजीकरण होता है, लेकिन जिला के कई हिस्सों में यह काम बाधित है।
प्रतिदिन बनती हैं 450 से अधिक स्लाइड
बारिश के मौसम में स्वास्थ्य विभाग डेंगू व मलेरिया के खिलाफ अभियान चलाता है। इस दौरान हड़ताल शुरू होने से पहले प्रतिदिन एमपीएचडब्ल्यू द्वारा फील्ड में 468 से अधिक स्लाइड तैयार की जाती थी, लेकिन अब पांच दिन से यह काम बंद पड़ा है।
मरीजों ने बयान किए हालात
केस एक
मैं पिछले पांच महीने से टीबी की दवा ले रही हूं, अब महज एक महीने का कोर्स बचा हुआ था, लेकिन बुधवार व वीरवार को दवा नहीं मिली। गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र में दवा नहीं पहुंच रही हैं। इसके चलते भंभेवा गांव स्थित पीएचसी भी गई, लेकिन यहां चिकित्सकों ने हड़ताल का हवाला देकर दवा देने से मना कर दिया।
नेहा, मोरखी गांव निवासी
केस दो:
मैं व मेरी पत्नी दोनों टीबी से पीड़ित हैं। हम राजपुरा भैण गांव स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर प्रति दिन दवा लेने जाते थे, लेकिन पिछले चार दिन से यहां दवा नहीं मिल रही है। मैं पिछले पांच महीने से दवा ले रहा हूं, जबकि मेरी पत्नी दो महीने से दवा ले रही है। अब फिर से कोर्स शुरू करना पड़ेगा।
राजेश, राजपुरा गांव निवासी।
टीबी के मरीजों के लिए टीबी प्रभारी डॉ. जितेंद्र कुमार से बात है। उन्होंने बताया है कि जहां एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारी नहीं हैं, वहां आशा वर्कर से दवा बंटवाने की व्यवस्था की गई है। यदि मरीजों को परेशानी हो रही है तो इसका तुरंत निदान करवाया जाएगा।
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डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन।
आज धरना स्थल पर एमपीएचडब्ल्यू एसोसिएशन फूंकेगी वित्तमंत्री का पुतला
जींद। बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन ने अपनी मांगों के लागू न होने के रोष स्वरूप शुक्रवार को भी पांचवें दिन जिला प्रधान संदीप कुंडू की अगुवाई में नागरिक अस्पताल में धरना दिया। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ गुस्सा निकाला। संदीप कुंडू ने कहा कि शनिवार को वित्तमंत्री का पुतला फूंका जाएगा। धरने को सर्व कर्मचारी संघ के रामफल दलाल, एलटी एसोसिएशन के राज्य प्रधान विक्रम सिंह, बिजली निगम के राज्य प्रधान सुरेश राठी, रेडियो ग्राफर के आजाद खटकड़ व ग्राम पंचायतों ने समर्थन दिया। जिला सचिव सुशील शर्मा व कैशियर अनिल लाठर ने निंदा करते हुए कि सरकार स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों की अधिसूचना करने की बजाय खोखले पत्र जारी करके आंदोलन को कमजोर करने की असफल कोशिश कर रही है। इस अवसर पर राज्य महासचिव हरिनिवास, नफे सिंह, बीरमति देवी, स्नेहलता, भूपेंद्र, निर्मल, राजबाला, कुलदीप चहल, दर्शन सिंह, शकुंतला लाठर, अनीता पोली, अमरजीत, सुदेश देव, विकाश भी मौजूद रहे।
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