अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
शहर में सफाई के टेंडर पर चल रहा विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है। छह महीने में तीन बार सफाई का टेंडर रद्द होने से नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं। हालांकि नगर परिषद के अधिकारी पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बता रहे हैं। इसको लेकर शुक्रवार को अनुसूचित जाति-ए की महापंचायत भी खुलकर सामने आ गई। अधिकारियों और नगर परिषद चेयरमैन पर टेंडर में गड़बड़ी करने के आरोप लगाकर अनुसूचित जाति ए वर्ग में सोमवार को नगर परिषद के बाहर धरना देने का ऐलान किया है।
शुक्रवार को रोहतक रोड पर नगर पार्षद सुदेश देवी के प्रतिष्ठान पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अनुसूचित जाति-ए महापंचायत के अध्यक्ष देवदास वाल्मीकि ने आरोप लगाए कि नगर परिषद में इस ठेके को लेकर भ्रष्टाचार चल रहा है। इसमें जिला स्तर के अधिकारी भी सरकार की शह पर नियमों को ताक पर रख रहे हैं। ऐसे में अनुसूचित जाति ए महापंचायत इसके खिलाफ आंदोलन शुरू करेगी।
अनुसूचित जाति को बरगला रही सरकार
देवदास वाल्मीकि ने कहा कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति के लोगों को बरगला रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की थी कि सफाई के ठेकों में अनुसूचित जाति के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बावजूद ऐसा नहीं हो रहा रहा है। देवीदास वाल्मीकि ने कहा कि करीब छह महीने पहले ठेका रद्द होने के बाद दो फरवरी को टेंडर के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें सभी लोगों ने आवेदन किया, जिसमें एससी सोसायटी भी शामिल थी। इसका टेंडर 15 फरवरी को खुलना था। 15 फरवरी को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दौरा होने के कारण टेंडर नहीं खोला गया। यह अनियमितता है। इसके बाद दो दिन की छुट्टी थी। बाद में इस टेंडर को रद्द कर दिया गया। दोबारा टेंडर मांगा गया, जो 15 मार्च को खुलना था, लेकिन नगर परिषद ने इसे भी रद्द कर दिया। अब तीसरी बार टेंडर रद्द किया गया है।
ऐसे शुरू हुआ विवाद
करीब छह महीने पहले नगर परिषद ने घर-घर से कूड़ा उठाने से लेकर इसको डंपिंग साइट तक पहुंचाने और सफाई के लिए टेंडर निकाला था। उसी समय नगर परिषद की चेयरमैन पूनम सैनी के पति और भाजपा के प्रदेश सचिव जवाहर सैनी का ऑडियो वायरल हुआ। इसमें वे कमीशन की मांग कर रहे थे। हालांकि जवाहर सैनी ने कहा कि वे अपने निजी कारोबार की बात कर रहे हैं। यह मामला सामने आने के बाद डीसी अमित खत्री ने टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी थी।
पार्षद भी देंगे साथ
जिस प्रकार से टेंडर रद्द हो रहे हैं, इससे साफ है कि नगर परिषद में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। इसकी जांच होनी चाहिए। अनुसूचित जाति-ए महापंचायत ने जो मुद्दा उठाया है, वह सही है। इसमें विपक्ष के सभी पार्षद भी उनका साथ देंगे।
सुदेश देवी, पार्षद।
शर्तें बदलने के कारण रद्द हुआ टेंडर
पहली बार जब नगर परिषद द्वारा टेंडर मांगे गए थे, उसमें डीसी अमित खत्री ने एक शर्त जुड़वा दी। इसके तहत शहर के रिहायसी यूनिट से प्रति माह 30 रुपये, कॉमर्शियल यूनिट से 50 रुपये और बड़े संस्थानों से 100 रुपये वसूलने का प्रावधान किया गया। इसके कारण पहली टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा टेंडर लगाए गए। दूसरी बार के टेंडर में महज एक टेंडर आया है। उस सोसायटी के पास नियमानुसार न तो अनुभव है और न ही लाइसेंस। ऐसे में उसे रद्द कर दिया गया है। अब तीसरी बार के लिए टेंडर मांगे गए हैं। इसके लिए 26 मार्च तक टेंडर भरे जा सकते हैं। इसमें सामान्य श्रेणी के ठेकेदार भी टेंडर भर सकते हैं। सारी प्रक्रिया नियमानुसार हुई है। इस प्रकार के आरोप बेबुनियाद हैं।
डॉ. एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद जींद।
आरोपों में नहीं दम
सारी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है। कुछ लोग सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया में किसी को लाभ पहुंचाने का प्रयास भी नहीं हो सकता। नगर परिषद ई-टेंडरिंग प्रणाली पर ही काम करता है। ऐसे में आरोपों में कोई दम नहीं है।
पूनम सैनी, चेयरमैन, जींद नगर परिषद।