जींद। जिले की अनाज मंडियों में अब तक 51 लाख क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है। इसके विपरीत 39 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद की गई। शनिवार को जिलेभर की मंडियों में तीन लाख क्विंटल गेहूं की आवक हुई। इसके अतिरिक्त जिलेभर की मंडियों में खरीदे गए गेहूं की 40270 करोड़ रुपये की पेमेंट किसानों के खाते मं डाली गई है।
जिले में उठान कम होने के कारण अब तक खरीदे गए गेहूं का 23 प्रतिशत ही उठान हुआ है। शनिवार को डेढ़ लाख क्विंटल गेहूं का उठान हुआ, जबकि अब तक सवा 8 लाख क्विंटल गेहूं का उठान हुआ है। उठान की गति कम होने के कारण मंडियों में किसानों की पेमेंट नहीं हुई। 40270 करोड़ रुपये की जो पेमेंट जिले में किसानों के खाते में डाली गई है। यह खरीद की मात्र 12 प्रतिशत ही पेमेंट हुई है। अगर मंडियों पिछले एक सप्ताह में आवक ज्यादा होने के कारण उठान की गति उसके विपरीत कम चल रही है। उठान बढ़ाने के लिए डीसी ने भी खरीद एजेंसियों व ढुलाई के ठेकेदारों को निर्देश दिए हैं। इसके विपरीत मार्केट कमेटी सचिव ने भी नोटिस जारी किए हैं, ताकि मंडियों में आवक के अनुसार उठान कराया जा सके। मंडियों में उठान की गति धीमी होने के कारण आढ़तियों की दुकानों की ऊंचाई से ज्यादा ढेर लगे हुए हैं। इसमें शुक्रवार रात को हुई बरसात के दौरान गेहूं के लगे इन ढेरों पर ढकने के लिए मंडी में कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। कुछ ही दुकानों पर बोरियों पर तो कहीं खुली ढेरियों पर तिरपाल ढालकर बचाने का प्रयास जरूर किया, लेकिन यह सुविधा गेहूं को बरसात से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके कारण मंडियों में आढ़तियों को करोड़ों रुपयों का अनाज खराब होने का डर बना हुआ था।
हर वर्ष उठान को लेकर होती है परेशानी
मंडियों में आवक व खरीद के मुकाबले हर वर्ष उठान को लेकर परेशानी होती है। इस बार ट्रांसपोर्ट व लेबर के ठेके को लेकर भी प्रशासन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इनके लिए भी पांच बार टेंडर लगाने पड़े थे, लेकिन अब उसी तर्ज पर उठान को लेकर मंडियों में परेशानी बनी हुई है। इसको लेकर प्रशासनिक अधिकारी निर्देशों तक ही सीमित हैं। किसी भी एजेंसी या ठेकेदार पर ढिलाई के बावजूद भी कार्रवाई नहीं की गई।
अगले दो दिन में शहर की मंडी समेत कई मंडियों में होगा रास्ता बंद
अगर उठान की गति इसी तरह से चली तो अगले दो दिन में जींद की अनाजमंडी समेत खंड स्तर की कई मंडियों में गेहूं के वाहन लेकर आने वाले किसानों के लिए भी रास्ता बंद होने के हालात हो जाएंगे। पिल्लूखेड़ा व सफीदों की मंडी के हालात उठान नहीं होने के कारण गंभीर बने हुए हैं। पिल्लूखेड़ा मंडी में गेहूं उतरवाने के लिए जगह की कमी होने के कारण मंडी के आसपास कई स्थानों पर खेतों में गेहूं उतारे जा रहे हैं। इसकी तरफ भी प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।
मंडियों से गेहूं उठान के बाद तुरंत किसानों के खाते में पेमेंट डलवाई जा रही है। पिछले एक सप्ताह में आवक ज्यादा होने के कारण उठान की गति धीमी हुई है। अब मंडियों में गेहूं की आवक पिछले दिनों की अपेक्षा कुछ कम हुई है। अब उठान की गति तेज करवा दी जाएगी, साथ ही किसानों के खाते में पेमेंट भी सभी खरीद एजेंसियों से करवाई जा रही है।
-राजेश आर्य जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी जींद।