अमर उजाला ब्यूरो
जींद। आरटीआई के आधार पर नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वाले नेत्र चिकित्सा सहायक राजबीर बेरवाल पर अब अस्पताल प्रबंधन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्रबंधन ने पत्रकार वार्ता करने को स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल करने का कारण माना है। अब इसके लिए बेरवाल को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। वहीं इस मामले की शिकायत सरकार को भी की जाएगी। दूसरी ओर करीब एक महीना पहले अस्पताल में सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी की जांच के दौरान काम में बाधा पहुंचाने की रिपोर्ट भी डीसी को भेजी गई है। हालांकि बेरवाल का कहना है कि वे लोगों को बेहतर सेवा दिलवाने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि अस्पताल के नेत्र चिकित्सा सहायक ने बुधवार पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाए थे कि पिछले दो साल में वर्तमान सिविल सर्जन के आने के बाद 790 लोगों को नौकरी के लिए मेडिकल करवाने अग्रोहा भेजा गया। बेरवाल का कहना है कि यह सुविधा लोगों को नागरिक अस्पताल जींद में ही मिलनी चाहिए। उनकी पत्रकार वार्ता को अस्पताल प्रबंधन ने विभाग के नियमों के खिलाफ माना है। सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया का कहना है कि सरकारी कर्मचारी इस प्रकार से पत्रकार वार्ता नहीं कर सकता। विशेषकर अपने ही विभाग में यदि कोई बात है तो उसे सही मंच पर उठानी चाहिए। अस्पताल के अधिकारियों का मानना है कि ऐसा कर बेरवाल ने स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल की है। ऐसे में उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा गया है और इसकी शिकायत सरकार को भेजी जाएगी।
पुराने मामले में भी डीसी को भेजी रिपोर्ट
करीब छह महीने पुराने मामले में भी स्वास्थ्य विभाग राजबीर बेरवाल के खिलाफ रिपोर्ट डीसी अमित खत्री को भेजी है। गौरतलब है कि जनवरी में कंडेला गांव की सीएचसी में वहां के एसएमओ डॉ. राजेश भोला के साथ मारपीट हुई थी। इस मामले में कुछ महिला कर्मचारियों ने पुलिस को शपथपत्र देकर एसएमओ पर सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगाए थे। इस पर पुलिस ने इस मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग की सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी को भेजी थी। आरोप है कि जिस समय कमेटी जांच कर रही थी, बेरवाल ने उनके काम में बाधा डाली और कमेटी की सदस्यों को धमकाया। यह मामला डीसी कार्यालय के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के पास आया था। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रिपोर्ट डीसी कार्यालय को ही भेज दी है।
मैं कर्मचारी होने के साथ-साथ कर्मचारी यूनियन में पदाधिकारी भी हूं। लोगों के हित में तमाम मुद्दे उठाना एक नागरिक का फर्ज है। विभाग का कर्मचारी होने के नाते विभाग की गड़बड़ी में हस्तक्षेप करना भी मेरा काम है। मुझे अभी तक नोटिस नहीं मिला है। नोटिस मिलने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। विभाग या डीसी कार्यालय को रिपोर्ट भेजने के लिए सिविल सर्जन स्वतंत्र हैं। वे ऐसा कर सकते हैं।
-राजबीर बेरवाल, नेत्र चिकित्सा सहायक, नागरिक अस्पताल जींद।