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दिल्ली के लद्दाख बुद्ध भवन में हरियाणा के दलित पीड़ित परिवारों ने अपनाया बोध धर्म

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद।
मांगों को लेकर 113 दिन से लघु सचिवालय के बाहर धरना दे रहे अनुसूचित जाति के लोगों ने दिल्ली कूच किया। 27 मई को दिल्ली कूच के बाद वीरवार को 120 लोगों ने दिल्ली के लद्दाख बुद्ध भवन में बौद्ध धर्म में आस्था जताते हुए इसे अपना लिया। इन लोगों का आरोप है कि वे 113 दिन से आंदोलन कर रहे हैं, मांगों पर सहमति बनने के बावजूद सरकार उन्हें पूरा नहीं कर रही है।
ईश्वर सिंह न्याय संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिनेश खापड़ ने कहा कि तीन साल पहले छात्तर गांव निवासी सतीश कुमार सीआरपीएफ में तैनात रहते शहीद हुए थे। उनके परिवार को सरकार ने कोई सहायता नहीं दी। इसी प्रकार 1995 में हरियाणा पुलिस में सेवा के दौरान सूबे सिंह की मौत हुई थी। उनको भी कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। झांसा निवासी छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में सीबीआई जांच शुरू नहीं करवाई गई। सवा साल पहले ईश्वर सिंह ने आत्महत्या की थी। इस मामले की सीबीआई जांच नहीं शुरू की गई है। खापड़ ने कहा कि सात मार्च को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हुई बातचीत में 15 दिन में मांगें पूरी होने का आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे नाराज होकर इन परिवार के साथ कुछ अन्य लोगों ने बौद्ध धर्म को अपनाया है।
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मांगों के लिए धर्म बदलना गलत
बौद्ध धर्म सनातन धर्म का ही हिस्सा है और भगवान बौद्ध को विष्णु का अवतार माना गया है। ऐसे में यह धर्म परिवर्तन नहीं है। फिर भी सिर्फ अपनी मांगों के लिए धर्म बदलना सही नहीं है। इससे न तो धर्म बदलने वालों का व न ही बाकी लोगों का भला होगा। यह लोग अनुसूचित जाति से संबंधित हैं। क्या धर्म परिवर्तन के बाद ये भगवान कबीर, वाल्मीकि या भगवान रविदास को नहीं मानेंगे। यदि नहीं मानेंगे तो विश्व को राह दिखाने वाले इन महान लोगों का अस्तित्व कैसे बचेगा। लोगों को इकट्ठा होकर अपनी मांगों के लिए लड़ना चाहिए। इस प्रकार के कदम नहीं उठाने चाहिएं।
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-योगेश, संयोजक, धर्मजागरण, समन्वय।
जारी रहेगा संघर्ष
यह संघर्ष जारी रहेगा, लोगों ने अपना विरोध जताने के लिए यह किया है, लेकिन इससे संघर्ष नहीं रुकेगा। मुख्यमंत्री ने खुद माना था कि सभी मांगें मानी गई हैं और उनको पूरा किया जाएगा। फिर भी ऐसा दलित होने कारण ही किया जा रहा है।
-दिनेश खापड़, अध्यक्ष, ईश्वर सिंह न्याय संघर्ष समिति।
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