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प्रात्साहन राशि को लेकर सहकारी दुग्ध समिति का आंदोलन मिल्क प्लांट ठप

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद।
सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादक किसानों को प्रति लीटर पांच रुपये देने की घोषणा के बाद आंदोलन कर रहे सहकारी दुग्ध समिति संचालकों की हड़ताल का मिल्क प्लांट की सेवा पर व्यापक असर पड़ा है। मिल्क प्लांट से प्रतिदिन 27 हजार से 35 हजार लीटर दूध व अन्य उत्पादों की मांग होती है, लेकिन शुक्रवार सुबह महज 3500 लीटर दूध ही पहुंचा। ऐसे में वीटा अब पाउडर से दूध व अन्य उत्पाद बनाने की योजना पर काम कर रहा है। मिल्क प्लांट के सूत्रों के अनुसार प्लांट के पास फिलहाल करीब तीन हजार मीट्रिक टन पाउडर तैयार है।
दरअसल सरकार द्वारा दी गई प्रोत्साहन राशि पर दुग्ध समिति और मिल्क प्लांट के बीच पेंच फंसा हुआ है। सहकारी समितियों का कहना है कि सरकार द्वारा दी गई पांच रुपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि समितियों के खाते में डाली जाए, जबकि मिल्क प्लांट यह राशि डालने के लिए सीधे दुग्ध उत्पादक किसानों के खाते मांग रहा है। इसको लेकर पहले भी आंदोलन हो चुका है। जींद-हिसार मिल्क प्लांट को फिलहाल 650 दुग्ध समितियां प्रतिदिन करीब 67 हजार लीटर दूध भेज रही हैं, जबकि मिल्क प्लांट के पास प्रतिदिन 27 से 35 हजार लीटर दूध की मांग है। इसमें पानीपत में 23 हजार लीटर, हिसार में साढ़े 13 हजार लीटर, जींद में साढ़े सात हजार लीटर व अन्य छोटे कस्बों में करीब चार हजार लीटर दूध की मांग रहती है। इसके अलावा अन्य उत्पाद अलग से हैं। शेष दूध से अन्य उत्पाद व पाउडर बनाया जाता है। दो महीने पहले तक मिल्क प्लांट को प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर दूध मिल रहा था।
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सात करोड़ की राशि पर छिड़ी है रार
सरकार द्वारा जारी की गई प्रोत्साहन राशि पर मिल्क प्लांट व सहकारी समितियों के बीच रार छिड़ी हुई है। समितियों का कहना है कि सरकार द्वारा जारी राशि उनके खाते में डाली जाए। दरअसल सरकार द्वारा अप्रैल से सितंबर तक मिल्क प्लांट को दूध देने वाले किसानों को पांच रुपये प्रति किलोग्राम की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। यह राशि दी जींद-हिसार मिल्क प्लांट में करीब सात करोड़ रुपये बनती है। हालांकि मिल्क प्लांट के सीईओ राजेंद्र सिंह के अनुसार इसका हिसाब किसानों की बैंक पासबुक आने के बाद उनके दूध के हिसाब से ही बनेगा।
नहीं आएगी दिक्कत
वीटा लोगों को दूध की दिक्कत नहीं आने देगा। इसकी पूरी तैयारी की गई है। भरपूर मात्रा में मिल्क पाउडर का स्टोक है। फिर भी जरूरत पड़ी तो दूसरे प्लांटों से दूध मंगवा कर सप्लाई किया जाएगा।
-राजेंद्र सिंह, सीईओ, वीटा मिल्क प्लांट जींद।
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किसानों के आह्वान से सब्जी मंडी बेअसर, अन्य दिनों से ज्यादा पहुंची सब्जी, रेट भी गिरे
किसान बोले- नहीं रख सकते घर सब्जी
दूसरी ओर किसानों द्वारा गांव बंद के तहत किसानों से सब्जियां व अन्य उत्पाद बाजार में नहीं लाने का आह्वान तो किया गया, लेकिन जींद की सब्जी मंडी में यह पूरी तरह बेअसर रहा। मंडी में आढ़तियों के अनुसार अन्य दिनों के मुकाबले अधिक सब्जी पहुंची और रेट भी कम रहे। हालांकि भाकियू नेता रामफल कंडेला ने किसानों से मंडी में पहुंचकर सब्जी गांवों में ही बेचने का आह्वान किया।
दरअसल स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट और अन्य मांगों को लेकर भाकियू ने एक से दस जून तक गांव बंद का आह्वान किया है। यूनियन का कहना है कि इस दौरान किसान अपना कोई भी उत्पाद बाजार में नहीं बेचे और न ही बाजार से कुछ सामन खरीदे। इसकी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार सुबह नई सब्जी मंडी का दौरा किया। यहां सब्जी की किसी प्रकार की कमी नहीं मिली।
गिरे हैं सब्जी के रेट
सब्जी 30 मई एक जून
तोरी 12-15 दस रुपये प्रति किलोग्राम
आलू 100 90 रुपये प्रति पांच किलो ग्राम
प्याज 90 80 रुपये प्रति पांच किलोग्राम
भिंडी 10 छह रुपये प्रति किलोग्राम
टमाटर 07 तीन रुपये प्रति किलोग्राम
हरी मिर्च दस आठ रुपये प्रति किलोग्राम
मूली आठ पांच रुपये प्रति किलोग्राम
बॉक्स
किसानों की हड़ताल का कोई असर नहीं है। मंडी में नियमित रूप से सब्जियों की सप्लाई है। पहले से सब्जियों के रेट कम हुए हैं। किसी भी सब्जी की कमी मंडी में नहीं है।
-सतीश कुमार, आढ़ती।
01जेएनडी22: सतीश कुमार, आढ़ती।
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किसान की फसल को भाव नहीं मिल पा रहा है, लेकिन किसान अपनी सब्जी को रख भी नहीं सकता। सरकार को कोई रास्ता निकलना चाहिए। किसान के लिए सब्जी रोकना संभव नहीं है।
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-कर्मबीर, किसान, गांव अमहेड़ी।
01जेएनडी29: कर्मबीर, किसान।
बॉक्स
किसानों को समझदार होना पड़ेगा। इसके लिए किसान खेतों में सड़क के किनारे ही सब्जी बेच सकता है। जिसको जरूरत होगी, वह गांव से ही सब्जी लेगा। दस दिन में सभी को किसान की अहमियत का पता चला जाएगा। शुक्रवार को आह्वान का खास असर नहीं है, लेकिन किसानों को समझाया जाएगा।
-रामफल कंडेला, महासचिव, भाकियू।
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