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किसान पंचायत में कृषि व बिजली अधिकारियों को सुनाई खरी-खरी

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद।
2003 में हुए किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों की याद में शुक्रवार को गुलकनी गांव में किसान शहीदी दिवस मनाया गया। इस दौरान भाकियू के नेताओं ने अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई। किसान नेता रामफल कंडेला ने तो यहां तक कह दिया कि किसानों को बर्बाद करने वाले ये चुनिंदा विभाग हैं।
दरअसल गुलकनी गांव में किसान यूनियन हर साल कार्यक्रम करती है। किसानों की समस्याएं सुनने के लिए शुक्रवार को यूनियन ने कृषि, बिजली और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि को अधिकारी खुद हजम करके कागजी कार्रवाई में किसानों को दिखाते हैं। गांव बंद आंदोलन को लेकर किसानों से संयम बरतने तथा पूर्ण रूप से गांव बंद रखने की अपील की गई। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने भी सरकार व अधिकारियों पर निशाना साधा। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला, प्रधान महासचिव सुरेश दहिया, उपाध्यक्ष प्रेमचंद शाहपुर, संगठन सचिव शाम सिंह मान, मेहताब कादियान, कार्यकारी अध्यक्ष छज्जूराम कंडेला, कैथल जिलाध्यक्ष राम सिंह खुराना, जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह घीमाना, सुरेश खुराना, प्रकाश राजपुरा, प्रताप सिंह पानीपत, रवि आजाद भिवानी, राज सिंह राणा, खजान सिंह, प्रदीप मिर्चपुर, कृष्ण ढांड, नंबरदार रामफल गुलकनी, श्रीराम गुलकनी, राममेहर नंबरदार सहित किसान मौजूद थे।
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दस किसानों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि वर्ष 2003 में बिजली के बकाया बिलों की अदायगी को लेकर भाकियू के बैनर तले छेड़े गए किसान आंदोलन में गुलकनी गांव में दस किसानों की मौत हुई थी। इस दौरान गुलकनी निवासी रामगोपाल, राजबीर सिंह, बिजेंद्र सिंह, नरेश कुमार व राजपुरा निवासी किसान महा सिंह, प्रकाश, दिलबाग सिंह, हवा सिंह की जान चली गई थी। कंडेला गांव के घायल किसान राजेश कुमार व राजेश शर्मा की बाद में मृत्यु हो गई थी।
जब बिजली अधिकारियों की बोलती हुई बंद
कार्यक्रम के दौरान महासचिव रामफल कंडेला ने बिजली निगम के अधिकारियों से पूछा कि उनके कितने बिजली शिकायत केंद्र हैं। अधिकारी ने बताया कि तीन केंद्र हैं। इस पर कंडेला ने कहा कि व्यवस्था कैसे चलेगी। इस पर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए।
कृषि विभाग ने लिया किसानों को भूखे मारने का ठेका
कार्यक्रम के दौरान जब किसान कृषि विभाग को समस्याएं बताने लगे तो टेकराम कंडेला ने कहा कि इस विभाग ने किसानों को भूखे मारने का ठेका ले रखा है। कंडेला ने कहा कि अधिकारी अनुदान तो खुद खा जाते हैं और किसानों को भूखा मारते हैं। कंडेला ने पूछा कि कितने सॉयल हेल्थ कार्ड बने, इस पर अधिकारी ने पूराने आंकडे़ बता दिए। कंडेला ने कहा अधिकारी कुछ नहीं करते।
भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से नहीं मिल रहा किसानों को योजनाओं का लाभ
रामफल कंडेला ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही उनकी भ्रष्टाचार की नीतियों को उजागर करते हुए कामचोर बताया और किसान को बर्बाद करने वाला कहते हुए अधिकारियों को लताड़ लगाई और किसान की बर्बादी का जिम्मेदार बताते हुए ज्ञापन सौंपा।
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सांसद से भी मांगा जाएगा पैसे का हिसाब : रामफल
रामफल कंडेला ने कहा कि अधिकारियों की बैठक में एक सांसद ने भी जिले के काम नहीं करने वाले अधिकारियों को लताड़ लगाई थी। अब उस सांसद से भी यह हिसाब मांगा जाएगा कि क्यों वह ऐसे कामचोर और भ्रष्ट अधिकारियों को जनता का पैसा सौंपते हैं। अगर समय पर जनता को सुविधा नहीं दे सकते तो उस पैसे की इतने लंबे समय में होने वाली बर्बादी का हिसाब अधिकारियों से लिया जाना चाहिए।
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