रोहतक। पीजीआई के तंत्रिका विज्ञान विभाग की ओपीडी में हर माह 4 से 5 भूलने की बीमारी (अल्जाइमर) के रोगी इलाज के लिए आ रहे हैं। यहां पुराने मरीज भी जांच के लिए लगातार आ रहे हैं। इन मरीजों को काउंसिलिंग के बाद दवा देकर उपचार दिया जा रहा है।
जाने क्या है अल्जाइमर
यह डिमेंशिया का ही एक प्रकार है। इसमें पीड़ित को भूलने की बीमारी हो जाती है। इसमें वह समय के साथ अपनी दिनचर्या की गतिविधियों को भी भूलने लगता है। जब बीमारी उच्च स्तर पर पहुंच जाती है तो वह परिवार वालों तक को नहीं पहचान पाता है। वह अपना ख्याल भी नहीं रख पाता। उम्र के साथ बीमारी का स्तर बढ़ता जाता है।
ऐसे किया जाता है इलाज
डॉ नीरज ने बताया कि अल्जाइमर का दवाइयों व काउंसिलिंग से इलाज किया जाता है। इसमें पीड़ित के हिसाब से भी इलाज तय किया जाता है। जैसे ज्यादा आक्रामक मरीजाें को मनोवैज्ञानिक के पास इलाज के लिए भेजा जाता है। ये मरीज डिप्रेशन, चिंता आदि के कारण भी होती है।
ऐसे मरीजों को सीधा मनोचिकित्सक के पास भेजा जाता है। अगर इसके होने का कारण मिल जाए तो मरीज सही हो सकता है। काउंसिलिंग में परिवार को भी शामिल किया जाता है। संवाद
कारण...
यह अनुवांशिक, पर्यावरण कारक जैसे प्रकूषण, धूम्रपान, हाइपरटेंशन व डायबिटीज से हो सकता है।
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कैसे बचाव करें
इससे बचने के लिए खुद को व्यस्त रखें। दिन-प्रतिदिन की मानसिक व शारीरिक गतिविधियों में भाग लेते रहें। जिंदगी को जिताना संतुलित बनाएंगे, उतना आप इससे बच सकते हैं।
लक्षण दिखने पर अनदेखा करें
डॉक्टर ने बताया कि कई लोग भूलने के लक्षण दिखने पर उसे अनदेखा कर देते हैं। ऐसा न करें। बीमारी बढ़ने से रोकने के लिए इस पर ध्यान दें। इस बीमारी के उच्च स्तर पर पहुंचने से महंगी दवाइयों का उपचार लेना पड़ता है। यह जेब पर भारी पड़ता है।