फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jind News: जिले की अनाजमंडियों में 31.60 लाख क्विंटल गेहूं की हुई आवक, 16.60 लाख बिका

Tue, 15 Apr 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
विज्ञापन
15जेएनडी23: जींद की अनाजमंडी में लगी गेहूं की बोरियों की ढेरियां। संवाद
विज्ञापन
जींद। जिले की अनाजमंडियों में मंगलवार तक 31.60 लाख क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है। पिछले दो दिन से आवक की गति भी ज्यादा हो रही है। इसके चलते खरीद प्रक्रिया में भी गति आई है। आवक व खरीद के मुकाबले गेहूं का उठान काफी धीमा है। अब तक 90 हजार क्विंटल गेहूं का ही सभी मंडियों से उठान हुआ है।
विज्ञापन

जिलेभर की मंडियों में अगर उठान की यही गति रही तो आगामी दो दिन में गेहूं डालने के लिए मंडियों में जगह नहीं बचेगी। इसके कारण आढ़ती व किसानों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जिलेभर की मंडियों में अब तक 44120 किसानों के गेहूं लेकर आने के गेट पास काटे गए हैं, जबकि 22753 गेटपास के गेहूं की खरीद हुई है। मंडियों में जगह की कमी होने के कारण मंडी के बाहर लगे धर्मकांटों पर वजन करवाकर आढ़ती एक ही ढेरी में गेहूं उतरवा रहे हैं। जिले की 36 मंडियों में से अब तक 32 में ही खरीद शुरू हुई है। उठान के अनुसार अब तक 40 हजार से अधिक गेटपास के गेहूं की पेमेंट अटकी हुई है। सरकार के निर्देशों के अनुसार किसान की फसल की पेमेंट 72 घंटे में करनी होती है, लेकिन खरीद व उठान देरी से होने के कारण किसानों का करोड़ों रुपया खरीद एजेंसियों की तरफ बकाया है।
डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि जिले की विभिन्न मंडियों और खरीद केंद्रों में गेहूं की आवक सुचारू रूप से जारी है। अब तक करीब खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 58,584 मीट्रिक टन, हेफेड ने 26489 मीट्रिक टन और हरियाणा वेयर हाउस ने 20648 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है। मंडियों में गेहूं के सुचारु प्रबंधन और त्वरित उठान के लिए पहले से ही सभी आवश्यक प्रबंध कर लिए गए थे। सभी खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि मंडियों से गेहूं के उठान कार्य में और अधिक तेजी लाई जाए, ताकि मंडियों में अव्यवस्था न हो और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। डीसी ने किसानों से अपील की कि वह मंडियों में गेहूं को सुखाकर ही लाएं। साथ ही उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वह फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष या फानों में आग न लगाएं। ऐसा करना न केवल प्रदूषण को बढ़ावा देता है, बल्कि भूमि की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि किसानों को चाहिए कि वह फसल अवशेषों का प्रबंधन वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीकों से करें ताकि पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ आने वाली फसलों की उत्पादकता भी बनी रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें