आईएमए ने नकारी आयुष्मान भारत योजना
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। केंद्र सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना को पहले ही चरण में झटका लगा है। योजना के तहत निजी अस्पतालों ने मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया है। ऐसे में इस योजना के तहत आने वाले मरीजों को हिसार का रुख करना पड़ेगा। वहीं आईएमए का कहना है कि योजना के तहत इलाज के लिए तय किया गया खर्च भी तर्क संगत नहीं है। ऐसे में निजी अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया है।
सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत जींद जिला में कुल 82786 परिवार आते हैं। इनमें से 60881 ग्रामीण व 21845 परिवार शहरी क्षेत्रों में हैं। योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोग यदि नागरिक अस्पताल में दवा लेने आते हैं तो उनका इलाज आयुष्मान मित्र के माध्यम से अलग से तय किए गए चिकित्सक द्वारा किया जाता है। यहां तक की यदि मरीज को दी जाने वाली दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं तो उसे बाजार से दवा खरीद कर उपलब्ध करवानी होती है। इस योजना के तहत पंजीकृत परिवार को एक साल में पांच लाख रुपये का इलाज मुफ्त मिलेगा।
अस्पताल में नहीं सुविधा
गौरतलब है कि जींद के नागरिक अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में यदि किसी मरीज को ऐसा इलाज दिया जाना है, जो अस्पताल में नहीं है, तो उसे हिसार ही जाना पड़ेगा। जींद के आयुष्मान चिकित्सक मरीज को हिसार में आयुष्मान चिकित्सक उसे पैनल पर रखे गए निजी अस्पताल में भेजेंगे।
निजी अस्पतालों ने खड़े किए हाथ
योजना शुरू होने से पहले ही जींद के सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया ने आईएमए के साथ मीटिंग कर आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाले मरीजों का इलाज करने का आह्वान किया, लेकिन निजी अस्पतालों ने कहा कि 2009 में शुरू हुई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत किए गए इलाज के बदले ही अभी तक पैसे नहीं मिले हैं। फिर से अस्पताल इस प्रकार का जोखिम नहीं उठा सकते। जिलाभर के अस्पतालों के करीब एक करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसके बाद आईएमए ने भी मीटिंग कर आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं करने का फैसला लिया है।
तर्क संगत नहीं है योजना
योजना के तहत पहले अपेंडिक्स के ऑपरेशन की कीमत नौ हजार रुपये रखी गई है, जबकि एनेस्थीसिया देने वाले डॉक्टर ही दो हजार रुपये लेते हैं। इसके अलावा मरीज को इनडोर रखना होता है। दवा देनी होती हैं और योजना के तहत खाना भी देना होता है। नौ हजार रुपये में यह ऑपरेशन नहीं हो सकता। वहीं यह खर्च पहले निजी अस्पताल को करना होता है और सरकार बाद में पैसे देती है। इसलिए निजी अस्पताल इस योजना के तहत इलाज नहीं कर रहे हैं।
डॉ. सुशील मंगला, सदस्य आईएमए।
धीरे-धीरे अपना लेंगे निजी अस्पताल
अभी योजना के तहत सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही इलाज किया जा रहा है। इसके बाद इसे धीरे-धीरे इसे ईएसआई पर लेकर जाया जाएगा। इसके बाद जब परिणाम बेहतर आएंगे तो निजी अस्पताल भी योजना को अपना लेंगे।
अमित खत्री, डीसी।