ओवर टाइम बंद होने से डिपो को प्रतिमाह होगी 45 लाख रुपये की बचत
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। रोडवेज द्वारा चालकों और परिचालकों का ओवर टाइम बंद करने से कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है। इससे जींद डिपो को प्रतिमाह करीब 45 लाख रुपये का लाभ होगा। जींद डिपो में 294 चालक व 319 परिचालक हैं। जिनका महीने में 7500 घंटे ओवर टाइम के बनते थे। चालक को 300 से 350 रुपये प्रति घंटा ओवर टाइम मिलता था। वहीं परिचाकों को 200 रुपये। इस हिसाब से महीनेभर में 294 चालकों के 22 लाख पांच हजार रुपये बनते थे। वहीं 319 परिचालकों के 7500 घंटे के हिसाब से 23 लाख 92 हजार 500 रुपये बनते थे। चालकों और परिचालकों का ओवर टाइम बंद करने पर कर्मचारियों को 45 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है। ऐसे में यह चालकों और परिचालकों के लिए बड़ा झटका है।
रोडवेज अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की 18 दिन की हड़ताल के दौरान विभाग को लगभग ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों से विभाग को हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम उठाया। जिसमें चालकों और परिचालकों को भारी नुकसान हो रहा है। ओवर टाइम समाप्त करने के बाद विभाग की व्यवस्था चरमरा गई है। जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लंबे रूटों पर बनता था ज्यादा ओवर टाइम
ओवर टाइम इंचार्ज रामनिवास ने कहा कि लंबे रूटों पर चलने वाले चालकों और परिचालकों का ओवर टाइम ज्यादा लगता था। जींद से मथुरा, दिल्ली, देहरादून, पटियाला, गुरुग्राम, पोंटा साहिब व हरिद्वार जैसे लंबे रूटों पर पांच से दस घंटे तक ओवर टाइम लगता था। वहीं लोकल रूटों पर कर्मचारियों का ओवर टाइम दिन में एक से दो घंटे ही लगता था।
अब करनी पड़ेगी सप्ताह में 48 घंटे ही ड्यूटी
प्रदेश सरकार द्वार रोडवेज चालकों और परिचालकों का ओवर टाइम समाप्त कर दिया गया है। नए नियमानुसार अब चालकों और परिचालकों को सप्ताह में 48 घंटे ही काम लिया जाएगा। लंबे रूटों पर चलने वाले यात्रियों के लिए बसों को सुचारु रूप से चलाया जाएगा। इसके चलते लंबे रूटों पर चलने वाले चालक व परिचालक की ड्यूटी का समावेश किया जाएगा। डीआई विभाग अधिकारी अजीत नेहरा ने कहा कि अभी नया रोटेश बनाने में दो दिन का समय और लगेगा। जिसके बाद एक दिसंबर से नए रोटेशन के हिसाब से बसों को चलाया जाएगा।
आफिस बाबुओं की हुई छुट्टी
ओवर टाइम समाप्त करने के बाद फ्लाइंग, यार्ड रूम, बुकिंग विभाग व कंप्यूटर रूम में क्लर्क के रूप में काम करने वाले 76 चालक व 86 परिचालाकों को अब अपनी मूल ड्यूटी पर जाना पड़ेगा। सालों से दफ्तर में काम करने वाले चालक और परिचालक की दफ्तर से छुट्टी कर दी गई है। नए रोटेशन के हिसाब से चालक व परिचालक कम पड़ रहे हैं। जिसके लिए विभाग ने मुख्यालय को 54 चालक व 117 परिचालकों की डिमांड भेज दी है।