अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
ई-पंचायत और अन्य मांगों के लिए जिला भर के सरपंचों ने सोमवार को सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया। इस दौरान सिटीएम सत्यवान मान को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। सड़कों पर उतरी गांवों की सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना पर भी सवाल उठाए। सरपंचों ने कहा कि निगरानी कमेटी के लोग अपने ही कार्यकर्ताओं से सीएम विंडो पर शिकायत लगवाकर सरपंचों को परेशान करते हैं। ऐसे में इस व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए।
सरपंच एसोसिएशन के बैनर तले जिला भर के सरपंच और उनके प्रतिनिधि सोमवार को डीआरडीए में एकत्रित हुए। यहां से प्रदर्शन करते हुए सरपंच लघु सचिवालय पहुंच और मांगों का ज्ञापन सिटीएम सत्यवान मान को दिया। ज्ञापन में सरपंचों ने कहा कि सरकार द्वारा अपनाई जा रही ई-पंचायत व्यवस्था का वे बहिष्कार करते हैं। सरपंचों का तर्क है कि गांवों में अभी तक न तो वाईफाई की सुविधा है और न ही पंचायतों में ग्राम सचिवों की नियुक्ति है। ऐसे में ई-पंचायत से काम करना नामुमकिन है। सरपंचों का आरोप है कि पंचायत एंव खंड विकास कार्यालयों में स्टाफ भी पूरा नहीं है, ऐसे में ई-पंचायत से काम करना संभव नहीं है। सरपंचों ने कहा कि कोई नई प्रणाली लागू करने से पहले सरपंचों को प्रशिक्षण दिया जाए। बिना प्रशिक्षण के नई व्यवस्था लागू होने से पंचायतों का काम प्रभावित होता है।
सरपंचों को मिले टीए-डीए
सरपंच एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि यदि कोई भी अधिकारी सरपंचों को जिला स्तर पर या अन्य कहीं भी कार्यक्रम के लिए बुलाता है तो उसके लिए सरपंचों को टीए-डीए दिया जाए। इससे पंचायतों पर बोझ पड़ता है और विकास कार्य बाधित होते हैं।
निगरानी कमेटी पर सवाल
प्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाई गई निगरानी कमेटी पर भी सरपंच एसोसिएशन ने सवाल उठाए हैं। सरपंच एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि इस व्यवस्था को बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि निगरानी कमेटी के लोग ही अपने कार्यकर्ताओं से सीएम विंडो पर शिकायत दिलवाते हैं और फिर सरपंचों को परेशान किया जाता है। उन्होंने मांग की कि पंचायतों को विकास कार्य के लिए मिलने वाले सामान के प्रशासन ने कम रेट निर्धारित किए हैं। इससे पंचायतों को सामान नहीं मिल पाता है। ऐसे में मार्केट रेट पर ही सामान खरीदने की व्यवस्था की जाए।
13 महीने से नहीं मिला मानदेय
सरपंचों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पढ़ी लिखी पंचायत बनाने के नाम पर पहल तो की, लेकिन गांवों के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया है। आलम यह है कि पंचों व सरपंचों को पिछले 13 महीने से मानदेय नहीं मिला है। इससे सरपंचों में निराशा है। साथ ही इन लोगों ने कहा कि विकास कार्यों के लिए पूरी ग्रांट नहीं मिल पा रही हैं। वही मुख्यमंत्री की घोषणाओं और विधायकों व सांसदों द्वारा गोद लिए गांवों में भी विकास कार्य नहीं हो रहे हैं।
क्या है ई-पंचायत
सरपंचों ने जिस ई-पंचायत पर आपत्ति जताई है, वह पूरी तरह से पंचायतों के काम को डिजिटल करने की प्रणाली है। इसके तहत पंचायतें अपने विकास कार्यों का रिकार्ड ऑनलाइन अपलोड करेंगी और इसके अनुसार ही पैसा जारी किया जाएगा, लेकिन पंचायतें इसका विरोध कर रही हैं।
सरपंच करें शिकायत
निगरानी कमेटी भ्रष्टाचार के साथ-साथ अधिकारियों द्वारा काम में बरती जाने वाली ढील को भी देखती हैं। इस प्रकार कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है कि किसी सरपंच को परेशान किया जा रहा हो। यदि किसी सरपंच की शिकायत है तो वह बताए। इसकी जांच की जाएगी।
डॉ. ओपी पहल, प्रभारी सोनीपत लोकसभा क्षेत्र निगरानी कमेटी।
महिला सरपंच रही नदारत
जिला में इस पर 150 से अधिक गांवों में महिला सरपंच बनी है, लेकिन सोमवार को हुए प्रदर्शन में सिर्फ पुरुष सरपंच ही मौजूद रहे। हालांकि कुछ गांवों से महिला सरपंचों के पति जरूर उनके प्रतिनिधि के रूप में प्रदर्शन में शामिल रहे।
सरकार ने रोका विकास
सरकार ने गांवों का विकास पूरी तरह रोक दिया है। सिर्फ केंद्र सरकार की ग्रांट के सहारे पंचायतें चल रही हैं। प्रदेश सरकार से जो बजट आना चाहिए, उसका 40 प्रतिशत भी नहीं आया है। ऐसे में 20 मार्च को अब पंचकूला में प्रदर्शन कर रोष जताया जाएगा। यदि फिर भी सरकार कुछ नहीं करती तो आगामी रणनीति की घोषणा वहीं की जाएगी।
सुरेंद्र राणा, प्रधान, जिला सरपंच एसोसिएशन।