छात्र नेता की हत्या का मामला : सात दोषियों को उम्रकैद, पांच को अंतिम सांस तक रहना पड़ेगा जेल में
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. संजीव आर्य की अदालत ने साढ़े पांच साल पहले छात्र की हत्या के जुर्म में सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इनमें से पांच लोगों को अंतिम सांस तक जेल में रहना होगा। साथ में अदालत ने सातों को जुर्माना भरने की भी सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
डोहाना खेड़ा गांव निवासी प्रदीप उर्फ काला की 30 मार्च 2013 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने फतेहाबाद जिले के समैण गांव निवासी कुलदीप उर्फ बबली के बयान पर केस दर्ज किया था। तब से यह मामला अदालत में चल रहा था। कुलदीप उर्फ बबली ने 30 मार्च 2013 को नरवाना पुलिस को शिकायत दी थी कि वह अपने दोस्त गांव डोहानाखेड़ा निवासी प्रदीप उर्फ काला तथा प्रदीप के पिता चंद्र सिंह के साथ कार में सवार होकर गांव डोहाना खेड़ा की तरफ जा रहा था। जब वे बडनपुर गांव के पास पहुंचे तो मोटरसाइकिलों पर सवार आधा दर्जन युवकों ने उनकी कार रोक ली और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से प्रदीप उर्फ काला की मौके पर ही मौत हो गई। सदर थाना नरवाना पुलिस ने कुलदीप उर्फ बबली की शिकायत पर शेरखां खेड़ी गांव निवासी विजय, जगदीप उर्फ दुखी, सुखविंद्र उर्फ मिढा हवलदार, नवनीत उर्फ जोनी, मोहन उर्फ मोना, कुलबीर उर्फ कालू और अजीत उर्फ सोनू के खिलाफ केस दर्ज किया था। सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. संजीव आर्य की अदालत ने जगदीप उर्फ दुखी, सुखविंद्र उर्फ मिढा हवलदार, नवनीत उर्फ जोनी, मोहन उर्फ मोना, कुलबीर उर्फ कालू को अंतिम सांस तक जेल में रहने और विजय व अजीत उर्फ सोनू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जगदीप उर्फ दुखी, सुखविंद्र उर्फ मिढा हवलदार, नवनीत उर्फ जोनी, मोहन उर्फ मोना, कुलबीर उर्फ कालू को दस हजार रुपये की भी सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। वहीं अजीत व विजय को जुर्माना नहीं भरने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।