जुलाना। गांव किलाजफरगढ़ में एक महीने में 20लोगों की जान जा चुकी है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। सोमवार को किलाजफरगढ़ गांव में एक साथ चार लोगों की चिताएं जलीं। एक दिन में चार लोगों की मौत से ग्रामीण दहशत में हैं। इसके बावजूद गांव में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम तक नहीं पहुंची है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में काफी लोगों को बुखार की शिकायत है। तीन-चार दिन बुखार होने के बाद उनको सांस लेने में परेशानी होती है और तीन दिन बाद ही मौत हो जाती है। कोरोना महामारी के चलते ग्रामीण जांच के लिए भी आगे नहीं आ रहे हैं। न तो खुद ग्रामीण ही स्वास्थ्य केंद्रों या अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं और न ही विभाग की कोई टीम गांव में पहुंची है। मरने वालों में तीन युवक शामिल हैं। काफी ग्रामीणों ने सरपंच के माध्यम से प्रयास भी किया गया गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को बुलाया जाए, लेकिन ग्रामीणों में भय है कि कहीं उनको कोरोना होने पर अस्पताल में दाखिल न कर दिया जाए। अस्पताल में यदि वह गए तो फिर वापस नहीं आ पाएंगे। अस्पताल में जाने से भी ग्रामीण भयभीत हैं।
गांव के पास बन रहा हाईवे भी कारण
गांव के पास हाईवे का निर्माण कार्य चल रहा है। यहां पर मिट्टी डाली जाती है। इस मिट्टी से दिनभर धूल उड़ती रहती है। गांव में काफी लोग अस्थमा के मरीज हैं। इस धूल के कारण इनको और अधिक परेशानी हो रही है। इस मिट्टी पर पानी डालने वाला भी कोई नहीं है। ग्रामीण सतबीर सिंह ने कहा कि सांस के रोगियों के लिए यहां उड़ने वाली धूल भी मौत का कारण बन रही है।
गांव में कुछ दिन पहले ही कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन लगाई गई थी। इस दौरान बहुत कम लोगों ने वैक्सीन लगवाई थी। आज तक स्वास्थ्य विभाग की टीम न तो गांव में आई है और न ही लोगों की कोरोना जांच की। एक महीने में 20 लोगों की मौत से से ग्रामीण काफी सदमे में हैं। सोमवार को एक साथ हुई चार लोगों की मौत ने इनकी चिंता और बढ़ा दी है। गांव में ऐसा कोई घर नहीं, जिसमें बुखार का मरीज नहीं हो। स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीणों की जांच करनी चाहिए।
कुलदीप सिंह, सरपंच किलाजफरगढ़।
गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को वैक्सीन लगाई है। जल्द ही टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी। मरीजों को कोरोना जांच के लिए जागरूक किया जाएगा। गांव में ही जाकर कोरोना जांच के लिए सैंपल लिए जाएंगे।
--डॉ. नरेश वर्मा, एसएमओ जुलाना।