अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में जिला भर के निजी चिकित्सकों ने मंगलवार सुबह छह बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक हड़ताल रखी। इसके चलते नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी अधिक रही। वहीं अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मरीजों को भटकना पड़ा। हालांकि अन्य सेवाओं पर अधिक असर नहीं पड़ा।
जींद के नागरिक अस्पताल में सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। निजी अस्पतालों की हड़ताल होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। निजी अस्पतालों की हड़ताल होने के कारण मंगलवार को नागरिक अस्पताल में अन्य दिनों के मुकाबले ओपीडी भी अधिक रही। अन्य दिनों में जहां 1100 मरीज इलाज के लिए आते थे, वहीं मंगलवार को 1303 मरीजों इलाज के लिए नागरिक अस्पताल पहुंच। दूसरी ओर आईएमए के बैनर तले जिला भर के निजी चिकित्सक नेहरू पार्क में एकत्रित हुए और धरना दिया। चिकित्सकों को इसके बाद प्रदर्शन कर लघु सचिवालय में डीसी को ज्ञापन सौंपना था, लेकिन सीटीएम सत्यवान मान ने दोपहर एक बजे नेहरू पार्क में ही पहुंच कर चिकित्सकों का ज्ञापन लिया।
बिल का कर रहे हैं विरोध
आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मपाल खर्ब ने बताया कि केंद्र सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन बिल ला रही है। इससे चिकित्सा के क्षेत्र में बुरे प्रभाव पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इससे इलाज मंहगा होगा, जिससे गरीब लोगों को इलाज करवाने में दिक्कत होगी। डॉ. खर्ब ने कहा कि नए बिल से चिकित्सा संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ेगा, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि नए बिल के अनुसार बिना एलोेपैथिक डिग्री के ही चिकित्सकों को एलोेपैथी इलाज की इजाज मिलेगी, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि नए बिल के बाद निज मेडिकल कॉलेजों को 40 प्रतिशत सीटों पर मनमर्जी की फीस तय करने का अधिकार होगा, जिससे गरीब लोगों को चिकित्सा के क्षेत्र में आने में दिक्कत होगी।
गलत करने वालों के साथ नहीं आईएमए
आईएमए के जिला मीडिया प्रभारी डॉ. सुशील मंगला ने कहा कि हाल में दो बड़े अस्पतालों के मामले सामने आए हैं। नए बिल के आने से इस प्रकार के मामले बढ़ेंगे। दरअसल बड़े अस्पताल डॉक्टरों के नहीं होकर कॉरपोरेट घरानों के हैं। यहां चिकित्सकों पर बहुत तरह के दबाव होते हैं। आईएमए चिकित्सा के नाम पर कुछ भी गलत करने वालों के साथ नहीं है।