फास्ट टैग को रोडवेज बसों के शीशे पर लगाने के लिए विभाग ने जारी किए आदेश,
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। रोडवेज बस चालकों को अब शीशे पर फास्ट टैग लगाना अनिवार्य होगा। इसके लिए रोडवेज जीएम ने कर्मचारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि रोडवेज बसों को दूसरे राज्यों में जाते समय टोल से गुजरना पड़ता है। रोडवेज विभाग ने कर्मचारियों को फास्ट टैग दिए हुए है। जिसे बस के शीशे पर चस्पा कर रूट पर जाना होता है। फास्ट टैग में चिप लगी होती है, इसमें बस नंबर, टोल राशि व रूट से संबधित जानकारी फीड होती है। बस के शीशे पर लगे फास्ट टैग को टोल टैक्स पर लगे स्कैनर दूर से ही स्कैन करते हैं। स्कैन के माध्यम से रूट की टोल राशि कट जाती है और कम समय में बस टोल से निकल जाती है। कर्मचारी मनमानी करते हुए फास्ट टैग को जेब में डाल लेते हैं। इससे गाड़ी को टोल टेक्स पर चेंकिग के लिए ज्यादा समय लगता है। अब रोडवेज जीएम ने चालकों को आदेश दिए है कि कर्मचारियों को फास्ट टैग बसों के शीशे पर लगाने होंगे।
जींद डिपो की 40 जाती हैं दूसरे राज्यों में
जींद डिपो में कुल 166 बस हैं। इसमें से 40 बस लंबे रूट पर दूसरे राज्यों में जाती हैं। विभाग ने इन बसों पर फास्ट टैग लगाने के आदेश जारी किए हैं। टोल टैक्स पर लगा स्कैनर फास्ट टैग को स्कैन कर टोल की राशि काट लेता है। पहले गाड़ियों के टोल के पास बनाए जाते थे। टोल पर पर्ची दिखाते समय ज्यादा समय लग जाता था। इससे कई बार टोल पर जाम की स्थिति बन जाती थी और यात्री समय पर अपने निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंच पाते थे। अब फास्ट टैग में लगी चिप से टोल टैक्स राशि, बस नंबर व रूट से संबधित सारी जानकारी दर्ज होती है। इससे कम समय में बस टोल से निकल जाती है।
एक महीने में एक फास्ट टैग का होता है इस्तेमाल
दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों पर फास्ट टैग लगाने के आदेश दिए गए हैं। एक महीने में एक फास्ट टैग का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक महीने की समाप्ति पर दूसरा टैग बस के शीशे पर लगा दिया जाता है। टोल पर एक स्पेशल लाइन फास्ट टैग के लिए बनाई हुई है। इसमें रोडवेज बसें कम समय में फास्ट टैग स्कैन करवा कर आसानी से निकल जाती हैं।
जीएस दूहन, वर्कशॉप मैनेजर जींद।