बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने फसलों का कम दिखाया नुकसान : ढुल
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जुलाना से इनेलो विधायक परमेंद्र सिंह ढुल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बारिश के पानी से फसल के कम नुकसान होने को दिखाया है, जबकि जिले से 13 करोड़ सरकार ने प्रीमियम बीमा कंपनियों को सौंपा है। इससे साफ है कि सरकार किसान हितैषी होने का ठोंग कर रही है और किसान को बर्बाद करने पर तुली हुई है। वह अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
ढुल ने कहा कि खरीफ फसल के लिए जिले के किसानों ने 2018 में बीमा कंपनियों के पास 13 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया। अकेले जुलाना क्षेत्र से 23112 किसानों ने फसल बीमा योजना के अंतर्गत प्रीमियम भरा था, जबकि कंपनियों ने केवल 3650 किसानों के क्लेम स्वीकार किए हैं। महज 28 गांवों में नाममात्र फसल नुकसान दर्शाया गया है। निडाना, ढिगाना, ललीतखेड़ा, शामलोकलां, गतौली, करसोला, फतेहगढ़, लिजवाना खुर्द व लिजवाना कलां, मेहरड़ा, पोली, गढ़वाली, खेड़ाबख्ता, भैरोंखेड़ा, पड़ाना, खिमाखेड़ी गांव ऐसे थे, जहां शत प्रतिशत फसल खराब हुई थी। इन गांवों में औसतन 500 एकड़ फसल का नुकसान दिखाया गया है, जबकि वास्तविकता यह थी कि औसतन 2500 एकड़ प्रति गांव नुकसान हुआ था। ऐसे सभी गांवों में आज भी 1000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में पानी भरा है, जिस पर रबी की फसल की बुआई भी नहीं हो सकेगी। विधायक ढुल ने कहा कि अक्टूबर में नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में वे मुख्यमंत्री से मिले थे। सीएम के सामने 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से 50 हजार एकड़ से ज्यादा की फसल में मुआवजे की मांग रखी गयी थी। इसके बावजूद बहुत कम नुकसान दिखाकर किसानों के साथ सरकार ने ठगी की है। इस मौके पर उनके साथ कैप्टन रणधीर चहल, धर्मराज शर्मा भी मौजूद रहे।
डरी हुई सरकार ने प्रश्नकाल का नहीं दिया सत्र में समय
ढुल ने कहा कि 28 दिसंबर को विभिन्न मुद्दों से डरी हुई सरकार ने एक दिन का ही शीतकालीन सत्र रखा है। इसमें प्रश्नकाल का भी समय नहीं रखा गया है। शीतकालीन सत्र में प्रश्नकाल का समय नहीं देकर सरकार ने संविधान का उल्लंघन किया है। उन्होंने 15 दिन पहले विधानसभा सत्र के लिए सवाल भेजे थे, जो मंजूर नहीं हुए हैं। अब सरकार ने प्रश्नकाल ही खत्म कर दिया है। ढुल ने कहा कि वे इसका संविधान की सीमा में रहकर जिस भी तरीके से विरोध होगा, करेंगे।