स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नकली घी विक्रेताओं पर कसा शिकंजा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
शहर में चल रहे नकली घी के धंधे पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को सफीदों गेट पर लगभग 12 दुकानों पर छापेमारी की। यहां दुकानदार 120 से लेकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक देसी घी बेच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी दुकानों से सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। अब इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य विभाग को लगातार सफीदों गेट के पास नकली घी बिकने की शिकायतें मिल रही थी। मंगलवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी ओम सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम सफीदों गेट पर पहुंची और यहां की दुकानों से सैंपल लिए। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी इसी बात पर सवाल उठा रही है कि 150 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से देसी घी कैसे मिल सकता है। जबकि मार्केट में 350 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम देसी घी बिक रहा है। वहीं गांवों में मिलने वाला देसी घी 700-800 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है। बहरहाल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यहां मिले घी की गुणवत्ता साबित होगी।
ऐसे बनता है नकली देसी घी
हालांकि इन दुकानों से लिए गए सैंपल से अभी घी के असली या नकली होने की पुष्टी नहीं हुई है, लेकिन शहर में कई जगहों पर नकली देसी घी का कारोबार सरेआम चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो नकली घी बनाने वाले कारोबारी सस्ता वनस्पति घी लेते हैं। इसके एक टिन (15 किलोग्राम) में एसएस नामक केमिकल की दस से 12 बूंद डाली जाती हैं। इसके बाद वनस्पति घी को गर्म किया जाता है। केमिकल से घी में ठीक वैसा ही दाना बन जाता है, जैसा देसी घी में होता है। केमिकल का असर यह होता है कि इससे वनस्पति घी में देसी की तरह ही खुशबू भी आती है।
घी के सैंपल लिए हैं
स्वास्थ्य विभाग को नकली घी बिकने की सूचना मिली थी। इसके बाद सफीदों गेट पर ही 10-12 दुकानों से सैंपल लिए हैं। इनको जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। यदि रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी आती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
ओम सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
फोटो नंबर
28जेएन15: घी के सैंपल लेते स्वास्थ्य विभाग की टीम।
28जेएनडी16: जांच के लिए पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी।