जलालपुर कलां में साढ़े तीन साल के लविश को याद है पिछले जन्म की घटनाएं
रामराये गांव में बता रहा है पिछला जन्म, खुद को बता रहा संदीप, 2006 में करंट लगने से हुई थी मौत
जहां लगा था करंट, उसी स्थान पर रहती है नजर
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
शहर से सटे जलालपुरा कलां गांव में जन्मे साढ़े तीन साल के लविश अपने पूर्व जन्म की घटनाएं बता रहा है। इससे पूरे परिवार सहित आसपास के लोग हैरत में हैं। परिवार के लोगों का दावा है कि साढ़े तीन वर्षीय बच्चा करीब दो महीने पहले उन्हें अपने-अपने आप ही आठ किलोमीटर दूर रामराये गांव में ले गया। सिर्फ गांव में ही नहीं बच्चा उनको ठीक उसी घर में ले गया, जहां उसके पहले जन्म का दावा किया जा रहा है। यहां पहुंचते ही बच्चे अपने कथित तौर पर पहले जन्म के माता-पिता को पहचान लिया और पूर्व जन्म में उनके खेत कहां है, इसको भी बताया। इसके बाद से बच्चे को देखने वालों का तांता लग रहा है।
जलालपुर कलां गांव में विनोद के घर में बेटे ने जन्म लिया। विनोद के पिता और लविश के दादा सुभाष का कहना है कि एक साल पहले जब लविश ने बोलना शुरू किया तो वह तोतली आवाज में रामरा-रामरा बोलता था। तब किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। लविश के दादा सुभाष उसे एक दिन रामराये गांव में लेकर चले गए। जब वे गाड़ी में रामराये गांव के बस स्टॉप पर पहुंचे तो बच्चा गांव की ओर हाथ करने लगा। इससे गाड़ी उसके हाथ के इशारे के अनुसार मोड़ी गई। एक जगह बच्चे ने चिल्लाकर गाड़ी को रुकवा लिया। यहां बच्चे ने गाड़ी से उतर कर पहले जन्म की मां बिमला और बड़े भाई विजयपाल को पहचान लिया। सुभाष के अनुसार लविश बिमला को लिपट गया। इनको छोड़ को पड़ोस की एक महिला कमला के घर गया और उस स्थान पर पहुंच गया, जहां संदीप को करंट लगा था। यहां पर निहारने के बाद लविश को घर ले जाया गया। जब इस बारे में लविश से पूछा गया तो उसने अपने परिवार के लोगों सहित पड़ोसियों को भी पहचान लिया।
अब साफ हुई तस्वीर
एक साल पहले हालांकि लविश ने अपने घर वालों को जो बताया, इसके बाद दोनों परिवारों के बीच में संबंध बन गए और दोनों परिवारों के बीच आना-जाना भी शुरू हो गया। अब लविश सिर्फ अपने ही नहीं खेत पड़ोसियों को भी पहचान रहा है।
पुराने हम उम्र दोस्तों को पहचान रहा है लविश
रविवार को जब लविश रामराये पहुंचा तो यहां उसने नाम लेकर अपने पुराने दोस्तों को भी पहचान लिया। जैसी एक युवक गली से गुजर रहा था, तो लविश ने अपने दोस्त को पुकारा। इसके बाद यहां सात-आठ युवकों में से अमित नामक दोस्त को पहचान लिया।
पुराने फोटो में दो भाभियों को पहचान
लविश रामराये गांव गया तो यहां परिवार को एक पुराना सामूहिक फोटो उसे दिखाया गया। इसमें लविश ने अपनी दो भाभियों को पहचान लिया, उनके पिछले जन्म तक उनके घर आ चुकी थी। इसी फोटो में संदीप की एक और भाभी का फोटो भी है, जो शादी कर संदीप की मौत के बाद रामराये आई, उसको वह नहीं पहचान पाया।
दोनों परिवारों में खुशी
पुर्न जन्म का दावा करने वाले इस बच्चे का जन्म भले ही दूसरे गांव में हो गया है, लेकिन इससे दोनों परिवारों में खुशी का माहौल है। कथित तौर पर पहले जन्म की मां बिमला के अनुसार जिस समय संदीप की मौत हुई वह, 19 साल का था। उन्हें जवान बेटे की मौत का बहुत गम था। अब उसके पुर्नजन्म से काफी खुशी मिली है। वहीं वर्तमान में उसकी मां मंजीत व दादी सरोज के अनुसार उन्हें खुशी है। लविश की भावनाओं का ख्याल रखा जा रहा है। नियमित रूप से उसे रामराये में उसके पहले परिवार से मिलवाया जाता है। यह भगवान का करिश्मा है।
एक्सपर्ट व्यू
सामान्य मनोविज्ञान में पुर्नजन्म को नहीं माना जाता, लेकिन पैरानोरमल मनोविज्ञान में इस प्रकार की बातों को मान्यता दी जाती है। पैरानोरमल मनोविज्ञान में आत्म को माना जाता है। जसलमेर के किलों के शोध में आत्माओं की पुष्टी हुई है। यदि जींद में ऐसा मामला है तो विवि से अनुमति लेकर विभाग इस पर शोध करेगा।
डॉ. शिव कुमार, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग, चौधरी रणबीर सिंह विवि
नहीं है वैज्ञानिक आधार
पुर्नजन्म वैज्ञानिक आधार और मान्यताओं पर खरा नहीं उतरता है। इस प्रकार के कई केस हम देख चुके हैं। यह सिर्फ भ्रांतियां मिलती है। सोमवार को इस मामले की भी जांच की जाएगी। तर्कशील सोसायटी का दावा है कि पुर्नजन्म नहीं हो सकता। इसको साबित कर दिया जाएगा।
सुभाष तितरम, अध्यक्ष तर्कशील सोसायटी।
फोटो नंबर
23जेएनडी16: अपने पिछले जन्म के खेत बताते लविश।
23जेएनडी17: डॉ. शिव कुमार, प्रोफेसर मनोविज्ञान।
23जेएनडी18: सुभाष तितरम।
23जेएनडी19: रामराये गांव में पिछले जन्म के मातापिता की फोटो के साथ लविश।
23जेएनडी20: पूरे मामले की जानकारी देते रामराये गांव निवासी बिमला और ज्योतिस्वरूप।
23जेएनडी21: लविश के दादा सुभाष।