पांच माह बाद अविश्वास प्रस्ताव के मतों की हुई गिनती, जिप चेयरपर्सन की गई कुर्सी
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पांच माह लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जिला परिषद की चेयरपर्सन पदमा सिंगला की कुर्सी का फैसला हो ही गया। अदालत के निर्देशानुसार शुक्रवार को लघु सचिवालय में तीन अक्तूबर को हुए मतदान की गिनती की गई। इसमें पदमा सिंगला के खिलाफ 18 मत मिले, जबकि एक मत पर कोई निशान नहीं लगा था। ऐसे में यह मत पदमा सिंगला के पक्ष में गिना गया। विरोधी गुट आखिरकार पदमा सिंगला को कुर्सी से हटाने में कामयाब रहा। पदमा सिंगला हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कह रही हैं।
जानकारी के लिए तीन साल पहले बनी जिला परिषद की चेयरपर्सन की कुर्सी को लेकर पिछले दो साल से खींचतान चल रही थी। न तो जिला परिषद का बजट आवंटित हो रहा था और न ही विकास कार्य हो रहे थे। ऐसे में पिछले साल 16 अगस्त को विरोधी पार्षदों ने तत्कालीन डीसी अमित खत्री को अविश्वास प्रस्ताव के शपथपत्र दिए। विरोधी पार्षदों का आरोप है कि पदमा सिंगला ने चेयरपर्सन रहते विकास कार्यों में भेदभाव किया है। इसको लेकर जिला प्रशासन द्वारा चार सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तारीख तय की गई, लेकिन डीसी के अचानक चंडीगढ़ में मीटिंग में जाने के कारण मीटिंग रद्द कर दी गी थी। इसके बाद तीन अक्तूबर को मतदान की तारीख तय की गई। इसमें पदमा सिंगला ने कहा कि चार सितंबर को मीटिंग में विरोधी गुट का एक भी पार्षद नहीं पहुंचा। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। उन्होंने तीन अक्तूबर के मतदान को अदालत में चुनौती दी। इस पर सुनवाई चलती आ रही थी। अब 18 मार्च को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रशासन को मतों की गिनती करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत ही शुक्रवार को गिनती की गई।
आंकड़ों की उलझन में फंसी रहीं पदमा, विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल
26 पार्षदों वाली जींद जिला परिषद की 15 मार्च 2016 को जब पदमा सिंगला चेयरपर्सन बनीं तब भी एक वोट से ही वे प्रवीण देवी को हरा पाई थीं। वहीं इस पूरे प्रकरण में विपक्षी पार्षदों की एकता पर सभी सवाल उठ रहे हैं। 16 अगस्त 2018 को डीसी को अविश्वास प्रस्ताव सौंपने वाले पार्षदों ने 22 पार्षदों के समर्थन का दावा किया था, लेकिन 19 पार्षदों ने ही अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मतदान किया। इनमें से भी एक पार्षद ने अपना मत पदमा सिंगला के खिलाफ नहीं दिया। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर महज एक मत से ही पदमा सिंगला हार गई। यदि एक और मत उनको मिल जाता तो कुर्सी बच जाती।
केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह से बढ़ती तल्खी के साथ ही खिसकती गई कुर्सी
जिस समय पदमा सिंगला जिला परिषद की चेयरपर्सन बनीं, उनके पति विनोद सिंगला भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के खासमखास होते थे। एक साल बाद ही उनकी बीरेंद्र सिंह के साथ दूरियां बढ़नी शुरू हो गई। इसके बाद पिछले साल 24 जनवरी को हुई मीटिंग में चेयरपर्सन पदमा सिंगला को सांसद दुष्यंत और इनेलो समर्थक पार्षदों का सहयोग मिलने के बाद बीरेंद्र सिंह का विरोध और तेज हो गए। इसके बाद से जिला परिषद का कोई काम नहीं हो सका और शुक्रवार को पदमा सिंगला को विरोधी पार्षदों ने चेयरपर्सन की कुर्सी से हटा दिया।
मीटिंग में पदमा सिंगला ने हस्ताक्षर और टेप बदलने के लगाए आरोप
मतों की गणना के लिए डीसी डॉ. आदित्य दहिया द्वारा दोपहर साढ़े 12 बजे का समय रखा गया था। 12:24 बजे पदमा सिंगला मीटिंग में पहुंचीं। इसके बाद 12:33 बजे मीटिंग शुरू हुई। 12:47 बजे मतपेटी को मीटिंग में लाया गया। दोपहर बाद पौने दो बजे चुनाव घोषित किया गया। इससे पहले मीटिंग के दौरान पदमा सिंगला ने आरोप लगाए कि तीन अक्तूबर को उन्होंने मतपेटी पर जो हस्ताक्षर किए थे, शुक्रवार को वही हस्ताक्षर नहीं थे। साथ ही उन्होंने कहा कि तीन अक्तूबर को खाकी रंग की टेप का प्रयोग किया था, लेकिन शुक्रवार को पारदर्शी टेप मतपेटी पर लगी मिली है। इसको लेकर उन्होंने सवाल उठाए, लेकिन डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने तमाम अधिकारियों से इसकी जांच करवाई। हस्ताक्षर सही पाए जाने पर परिणाम घोषित कर दिया गया। हालांकि डीसी ने हस्ताक्षर की फोरेंसिक जांच की बात भी कही है।
मैं इसे अपनी हार नहीं मान रही हूं, लेकिन मैंने जो हस्ताक्षर किए थे, उनका मिलान नहीं हुआ है। साथ ही मैं हाईकोर्ट के फैसले से भी सहमत नहीं हूं और अब सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी।
पदमा सिंगला।