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अंतराष्ट्रीय जाट चिंतन शिविर के दूसरे दिन भाजपा पर बरसे जाट

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अमर उजाला ब्यूरो
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नरवाना। जाट समाज पर किए गए अत्याचारों का खामियाजा भाजपा को आगामी चुनावों में भुगतना होगा। इसकी बानगी राजस्थान के उन चुनावों में भाजपा देख चुकी है। केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि पूरे देश का जाट समाज भाजपा को आइना दिखाने की तैयारी में है। यह बात अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पवनजीत सिंह बनवाला ने रविवार को चिंतन शिविर के दूसरे दिन कही। शिविर के दूसरे दिन 14 राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से भाजपा व केंद्र सरकार को जमकर कोसा और बहिष्कार करने के लिए जाट समाज में मुहिम शुरू करने का निर्णय लिया। इस मौके पर राजस्थान से कंवल सिंह जम्मू, भजन सिंह, गुजरात के बीराजी चौधरी, हंसमुख चौधरी, अश्वनी चौधरी, लक्ष्मण चौधरी, मध्यप्रदेश से रामनारायण तरर, उतराखंड से सुमित चौधरी, नरवाना खाप के चतर सिंह मोर, राजू बिसला, दाडन खान के ईश्वर सिंह श्योकंद, इटली से हर्ष श्योकंद, आस्ट्रेलिया से बाबी बजाड, कूष्णा चौधरी, सांगवान खाप के देवेेंद्र सांगवान एडवोकेट, मूला जाट संघ के डॉ. हबीब हुसैन, यशवीर थामस सहित अनेक प्रतिनिधियों ने शिरकत की। डॉ. पवनजीत सिंह बनवाला ने जाट युवाओं को उच्च शिक्षा लेने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जाट समाज में शिक्षा का प्रसार व प्रचार काफी देरी से हुआ है, जिसका नुकसान समाज के लोग आज तक भुगत रहे हैं। युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ जाते हैं। शिक्षा के साथ संस्कारों को भी ग्रहण करना होगा। तभी शिक्षा का वास्तविक फायदा जाट समाज के युवा उठा सकेंगे। इसके लिए आदर्श जाट महासभा गांव स्तर पर अभियान चलाएगी और ऐसे चिंतन शिविर अब गांवों में लगाए जाएंगे। इन शिविरों में जाट युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी को सटीक तरीके से निभाने के गुर सिखाए जाएंगे। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए महासभा खेल अकादमियां शुरू करने जा रही है।
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शिविर में दिखा जम्मू के किसानों का दर्द
चिंतन शिविर में जम्मू के सीमावर्ती किसानों का दर्द भी दिखाई दिया। जम्मू के कंवल सिंह ने बताया कि भारत पाक बार्डर पर जो किसान रहते हैं, उनमें ज्यादातर जाट समाज के हैं और फायरिंग के कारण उनका जीवन नरक बन चुका है। देश के तथाकथित राष्ट्रवादियों को उन किसानों का दर्द नहीं दिख रहा है। जो लोग दिल्ली जैसे महानगरों में वंदे मातरम, गोरक्षा व भारत माता की जयकार करवाने के लिए लोगों को मरवा रहे हैं, ऐसे लोग जम्मू क्यों नहीं आ रहे। पिछले चार साल में फायरिंग में 141 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 99 जाट समाज से हैं। इन लोगों की समस्याएं भी ऐसे शिविरों के जरिए सरकार तक पहुंचनी चाहिए। सभी ने हाथ उठाकर इसका समर्थन किया और गृहमंत्री से मिलने का फैसला लिया।
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