मुख्यमंत्री ने एक दिन गैस सिलेंडर देने के दिए आदेश, विभाग ने एक सप्ताह में शुरू की प्रक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। विपक्ष लगातार वर्तमान सरकार में अफरशाही हावी होने का आरोप लगा रहा है और सत्ता पक्ष के लोग इसे मानते नहीं हैं, लेकिन जींद में इसका जीता जागता उदाहरण सामने आया है। इससे साफ है कि अफरशाही के आगे मुख्यमंत्री के आदेश भी बौने पड़ रहे हैं।
दरअसल 14 अक्तूबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने जींद दौरे के दौरान लोगों से हाथ उठवाकर बोला था कि कितने ऐसे लोग हैं, जिनके घर पर रसोई गैस का सिलेंडर नहीं है। इस दौरान करीब 12 से 15 महिलाओं ने हाथ उठाया। मुख्यमंत्री ने आदेश दिए थे कि %कल ही’ इनको रसोई गैस सिलेंडर का कनेक्शन दे दें। इसके बावजूद एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी इन महिलाओं को रसोई गैस सिलेंडर तो क्या, अब किसी अधिकारी के दर्शन तक नहीं हुए हैं। वहीं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग प्रक्रिया शुरू करने की बात कह रहा है।
203093 गैस कनेक्शन
जिले में 15 गैस एजेंसी कार्यरत हैं और सभी के पास 203093 उपभोक्ताओं के कनेक्शन हैं। इनमें सफीदों गैस सर्विस के 36248, जींद गैस सर्विस के 13464, नरवाना गैस सर्विस के 18022, उचाना गैस सर्विस के 15410, कॉनफेड के 9274, भगवती गैस एजेंसी के 15755, मार्डन गैस के 12783, सत्यम गैस के 10876, नीलम गैस सर्विस के 19957, पारस गैस सर्विस के 18700, पूनम गैस सर्विस के 19591, एसजेआईवी एचपी गैस धमतान के 4858, फूल सिंह एचपी ग्रामीण गैस के 3705, जुलाना एचपी गैस के 1401 व जय दुर्गा एचपी गैस सर्विस के 3049 उपभोक्ता है। सरकार के दावे के अनुसार सभी घरों में रसोई गैस कनेक्शन है, लेकिन धरतल पर ऐसा नहीं है।
केस एक:
किसी ने संपर्क तक नहीं किया
इस मामले की जांच करते हुए अमर उजाला की टीम खरकरामजी गांव पहुंची। दरअसल खरकरामजी गांव निवासी गीता 14 अक्तूबर को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पहुंची थी। कमलेश ने भी सीएम के पूछने पर हाथ उठाया था। गीता ने बताया कि उसके पास न तो गैस सिलेंडर है और न ही किसी अधिकारी या कर्मचारी ने उससे संपर्क किया है। ऐसे में वह सामान्य दिनों की तरह ही चूल्हे पर खाना बना रही है। गीता के अनुसार उनको विश्वास तो था कि मुख्यमंत्री अब तो सिलेंडर मिल ही जाएगा, लेकिन यह भी अफरशाही की भेंट चढ़ता दिख रहा है।
केस दो:
बडनपुर निवासी कमलेश को भी हुई निराशा
दरअसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यक्रम में बडनपुर गांव निवासी कमलेश ने भी हाथ उठाकर कहा था कि उनके पास रसोई गैस सिलेंडर नहीं है। इसके बाद किसी ने भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। वह सामान्य दिनों की तरह ही अपने मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी और उपलों की आग में खाना बना रही है। कमलेश के अनुसार मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने में दिक्कत तो होती है, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं है कि रसोई गैस सिलेंडर कैसे मिलेगा।
उस दिन 12 महिलाओं ने अपने नाम लिखवाए थे। इनसे संपर्क करने पर दो महिलाएं ही पात्र पाई गई हैं। अन्य महिलाएं ओपीएस श्रेणी में आती हैं, जो गरीब तो हैं, लेकिन उनके नाम बीपीएल सूची में नहीं हैं। ऐसे में उनको सिलेंडर देने की प्रक्रिया शुरू की गई है, इसमें कुछ समय लगता है। छुट्टियां होने के कारण भी देरी हुई है।
राजेश कुमार आर्य, डीएफएसी, जींद।