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Jind News: चार माह में कुत्तों और बंदरों के काटने के 1686 मामले, जून में बढ़ा खतरा

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जींद। जिले में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार महीनों में कुत्तों और बंदरों के काटने के कुल 1686 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। हालात यह हैं कि जून महीने में रोजाना 50 से 60 मरीज नागरिक अस्पताल पहुंच रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या स्कूली बच्चों की है। आठ जून को सबसे अधिक 106 लोगों को कुत्ते और बंदरों के काटने के बाद एंटी रेबीज टीका लगाया गया।
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नगर परिषद द्वारा पहले यह जिम्मेदारी हरियाणा गोसेवा आयोग को सौंपी गई थी लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने से समस्या लगातार बढ़ती रही। अब प्रशासन इस कार्य को दोबारा नगर परिषद को सौंपने की तैयारी में है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डीसी ने तीन माह पहले सार्वजनिक स्थानों को कैटल फ्री बनाने के निर्देश दिए थे लेकिन बस अड्डा, नागरिक अस्पताल, सरकारी कार्यालयों और बाजारों के आसपास आवारा कुत्ते और बंदर खुलेआम घूम रहे हैं जिससे आमजन में दहशत का माहौल है।
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नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और लगातार बढ़ते हमलों पर रोक लगाई जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में कुत्तों के काटने के 352 और बंदरों के 23 मामले सामने आए। मार्च में यह संख्या बढ़कर कुत्तों के 384 और बंदरों के 62 हो गई। अप्रैल में 413 कुत्तों और 60 बंदरों के मामले दर्ज हुए, जबकि मई में 387 कुत्तों और 65 बंदरों के हमले सामने आए।

शहर में विशेष अभियान चलाया जाए
शहरवासियों राजकुमार गोयल, सुनील वशिष्ट ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों, बंदरों और अन्य पशुओं को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके और बढ़ते हमलों पर अंकुश लगाया जा सके।

चार माह के आंकड़े

माह कुत्तों के काटने के मामले बंदरों के काटने के मामले
फरवरी 352 23
मार्च 384 62
अप्रैल 413 60
मई 387 65
जून में अब तक 1200 से ज्यादा बंदर व कुत्तों के काटने के मामले आ चुके हैं। जून माह में प्रतिदिन 50 से 60 लोग कुत्तों और बंदरों के काटने के बाद उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
बाक्स
यह काम नगर परिषद से गो सेवा आयोग को दिया गया था। अब विभाग दोबारा से नगर परिषद को इस काम के हवाले करने की तैयारी में है। जब नगर परिषद को यह काम मिलेगा। उसके बाद इस पर काम होगा।
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-ऋषिकेश चौधरी, ईओ नगर परिषद जींद।
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