मिडिल स्कूल को दसवीं का दर्जा दिलाने के लिए अध्यापक घर-घर दे रहे दस्तक
अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। मिडिल स्कूल को दसवीं तक मान्यता दिलाने लिए दरोली खेड़ा मिडिल स्कूल के अध्यापकों ने टीम बनाकर घर-घर दस्तक देनी शुरू कर दी है। इसके तहत अध्यापक लोगों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि स्कूल को दसवीं कक्षा तक बढ़वाने के लिए 150 विद्यार्थियों की संख्या होनी चाहिए। बीते सत्र में विद्यालय में 60 विद्यार्थी थे। अब स्कूल अध्यापकों द्वारा शुरू की गई इस मुहिम के साथ जुड़ने के लिए अध्यापकों की टीम ने पंचायत से भी सहयोग करने का आह्वान किया है, ताकि आठवीं के बाद विशेषकर छात्राएं गांव में दसवीं तक की पढ़ाई कर सकें। पास के गांव भगवानपुरा में भी स्कूल के अध्यापकों की टीम घर-घर दस्तक देंगी। भगवानपुरा गांव से भी सुंदरीकरण में जिले में प्रथम आया था। शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई सुंदरीकरण योजना के तहत 2017-18 में स्कूल प्रथम आया था। इसके लिए डेढ़ लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली थी। इस राशि से स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ-साथ सौर ऊर्जा सिस्टम लगाया गया है, ताकि गर्मी के मौसम में विद्यार्थियों को बिजली नहीं होने पर परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि साल दर साल अभिभावकों का रुझान राजकीय स्कूल की तरफ बढ़ रहा है। 39 से 60 पहुंच चुकी छात्र संख्या को इस बार 150 तक लेकर जाने के लिए स्कूल स्टाफ कड़ी मेहनत कर रहा है।
दसवीं तक का स्कूल बनने से होगा फायदा
मुख्याध्यापक रघुबीर सिंह, संदीप, अमित, बाला, सुनील, बृजेश, एसएमसी प्रधान ज्योणा, सज्जन ने कहा कि स्कूल को दसवीं तक का दर्जा मिलने के बाद विद्यार्थियों को फायदा होगा। पंचायत को चाहिए कि वह इस मिशन में स्कूल स्टाफ का सहयोग करे। राजकीय स्कूलों में शिक्षा प्राइवेट स्कूलों से काफी सस्ती मिलती है। राजकीय स्कूलों में पढ़ाई का स्तर साल दर साल बढ़ रहा है। अभिभावकों की सोच अब बदल रही है। ऐसे में स्कूल को विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के बाद दसवीं का दर्जा मिले। इसके लिए दरोली के साथ-साथ भगवानपुरा के ग्रामीण स्कूल स्टाफ का सहयोग करते हुए अपने विद्यार्थियों को नए सत्र से स्कूल में दाखिल करवाएं।
अध्यापकों का प्रयास सराहनीय
स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 150 होने पर दसवीं तक का दर्जा मिलने के लिए स्कूल स्टाफ द्वारा किया जा रहा प्रयास सराहनीय है। वह भी इसमें पूरा सहयोग करेंगे ताकि अधिक से अधिक दाखिले अभिभावक स्कूल के करवाए। दसवीं तक का स्कूल बनने के बाद यहां के विद्यार्थियों को दूसरे गांवों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे शिक्षा का स्तर भी बढ़ेगा। विशेषकर छात्राओं को फायदा होगा। जो दसवीं तक का स्कूल गांव में न होने पर दूसरे गांवों में पढ़ने के लिए कम जा पाती हैं।
नसीब सरपंच, दरोली खेड़ा।