सिविल सर्जन और सर्व कर्मचारी संघ के बीच खींचतान जारी
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। करीब एक महीना पहले सर्व कर्मचारी संघ के राज्य ऑडिटर और नागरिक अस्पताल जींद में चिकित्सा सहायक राजबीर बेरवाल द्वारा सिविल सर्जन के खिलाफ खोले मोर्चे में अब दोनों ही पक्षों में खींचतान बढ़ गई है। इसके तहत सर्व कर्मचारी संघ ने सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए मंगलवार को नागरिक अस्पताल में धरना दिया। सर्व कर्मचारी संघ का कहना है कि सिविल सर्जन अपने चहेते चिकित्सकों को मुख्यालय में बैठाए हुए हैं। इससे जिले के मरीजों को काफी परेशानी होती है।
धरने के दौरान सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान रामफल दलाल ने कहा कि सरकार ने तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए पत्र जारी कर डिप्टी सिविल सर्जन व प्रथम व द्वितीय श्रेणी अधिकारियों के लिए सिविल सर्जन व दो चिकित्सकों की कमेटी को अधिकृत किया है। इसके बावजूद जींद के सिविल सर्जन नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों को मेडिकल के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेजते हैं। इससे इन लोगों का आर्थिक व मानसिक शोषण हो रहा है। दो साल में 790 लोगों को अग्रोहा भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि जब कुछ कर्मचारियों ने इस विषय को जनहित में उठाया तो, सिविल सर्जन ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस दौरान एक कर्मचारी नेता की पत्नी पर हेराफेरी कर नौकरी पाने जैसे आरोप लगाए गए।
कर्मचारियों की आवाज दबा रहे सिविल सर्जन
सर्व कर्मचारी संघ के राज्य ऑडिटर राजबीर बेरवाल ने कहा कि सिविल सर्जन अपनी मनमानी करते हुए कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग के तहत लगे कर्मचारियों की सुविधाएं दिलवाना सिविल सर्जन का काम है, लेकिन कर्मचारियों को ईपीएफ व अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसके विरोध में जब कर्मचारी आवाज उठाते हैं तो ठेकेदार से कहकर उनकी सेवाएं समाप्त करवा दी जाती हैं।
चहेते कर्मचारियों को लाभ देने के आरोप
राजबीर बेरवाल ने कहा कि सिविल सर्जन अपने चहेते चिकित्सकों को मुख्यालय पर बैठाए हुए हैं। डॉ. प्रभु दयाल चिकित्सा अधिकारी के पद पर होते हुए भी डिप्टी सिविल सर्जन के पद पर बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 में उनका तबादला हिसार होने के बावजूद उनकी सेवाएं जींद में जारी रखी जा रही हैं। इतना ही नहीं वे सरकारी आवास का भी लाभ ले रहे हैं। बेरवाल ने कहा कि डॉ. पालेराम की नियुक्ति उचाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में है, लेकिन उन्हें भी मुख्यालय में बैठाया गया है। इस प्रकार के और भी कई मामले हैं। उन्होंने आरोप लगाए कि अस्पताल में आउटसोर्सिंग के ठेके में भी भारी गड़बड़ी हुई है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि इस मामले में कार्रवाई की जाए।
यह तमाम आरोप व्यक्तिगत भावना के चलते लगाए जा रहे हैं। सभी काम नियमानुसार हो रहे हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण उम्मीदवारों को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। यह नियमानुसार है। स्टाफ की कमी के कारण मुख्यालय के काम सुचारू करने के लिए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। आरोप लगाने वालों की चोरी पकड़ी गई है, ऐसे में इस प्रकार के आरोपों का कोई औचित्य नहीं बनता।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन।