अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पुलिस की अपराध शाखा (सीआईए) में तैनात रूपगढ़ गांव निवासी स्पेशल पुलिस आफिसर (एसपीओ) जसबीर की हत्या के आरोप में उसी के गांव निवासी बिजेंद्र को पुलिस ने गतौली नहर के पास से ढाई महीने बाद गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बिजेंद्र को अदालत में पेश किया जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ करेगी व जिस पिस्तौल से गोली चलाई, वह भी बरामद करेगी।
डीएसपी कप्तान सिंह ने बताया कि 22 नवंबर 2017 को जसबीर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप गांव के ही सजायाफ्ता कैदी बिजेंद्र पर लगा। लेनदेन के चलते जसबीर की हत्या की गई थी। सीआइए वन जींद में एसपीओ के पद पर तैनात रूपगढ़ गांव निवासी जसबीर को हिसार में सजायाफ्ता कैदी उनके ही गांव के बिजेंद्र से पैसे लेने थे। इसको लेकर दोनों में विवाद चल रहा था। 22 नवंबर को जसबीर सरकारी काम से गांव जा रहा था। जब वह गांव के निकट पहुंचा तो बिजेंद्र ने अपने पास मौजूद हथियार से उस पर फायरिंग कर दी। गोली लगने के बाद परिजनों ने तुरंत ही नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया। जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जसबीर के चचेरे भाई वीरेंद्र ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि एक साल पहले जसबीर और बिजेंद्र ने छात्तर गांव में शराब ठेके लिए थे। इसमें जसबीर ने बिजेंद्र से 25-30 लाख रुपये लेने थे। इन रुपयों को मांगने के चलते बिजेंद्र ने उसके भाई जसबीर की हत्या कर दी।
अपने भाई की भी हत्या करना चाहता था बिजेंद्र
डीएसपी कप्तान सिंह ने बताया कि आरोपी बिजेंद्र से प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि वह अपने भाई लीला की भी हत्या करना चाहता था। लीला व बिजेंद्र की शराब के ठेकों में हिस्सेदारी व लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा है। इसलिए बिजेंद्र लीला को भी रास्ते से हटाना चाहता था।
हत्या के मामले में सजायाफ्ता है आरोपी
डीएसपी कप्तान सिंह व सीआईए प्रभारी सुरेंद्र कुमार के अनुसार एसपीओ जसबीर की हत्या करने के आरोपी बिजेंद्र ने कई वर्ष पहले हिसार में हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। हिसार अदालत ने उसको उम्रकैद व पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। पिछले दिनों एक चौथाई सजा काटने के बाद बिजेंद्र को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। उसके बाद से बिजेंद्र दूसरे लोगों के साथ मिलकर शराब ठेके लेने लगा। अब भी बिजेंद्र की कई गांवों के शराब ठेकों में हिस्सेदारी है।