अमर उजाला ब्यूरो
जींद। बाबा साहब डॉ. बीआर अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को यहां हुडा मैदान में विभिन्न दलित संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित संविधान बचाओ, देश बचाओ राज्य स्तरीय महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्हाेंने कहा कि यदि सरकार ने उन्हें पूरे संवैधानिक हक नहीं नहीं दिए तो वह सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन करने पर मजबूर होंगे। वह किसी सूरत में बाबा साहब द्वारा बनाए गए संविधान को बदलने नहीं देंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एसएल दहिया, जोगीराम खुंडिया, प्रीतम वाल्मीकि, संतलाल खटीक ने संयुक्त रुप से की।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि दलित समाज के लोग बाबा साहब को तो मन से मानते हैं, लेकिन उनकी बताई हुई बातों को नहीं मानते। समाज का उत्थान तभी संभव है, जब हम सब बाबा साहब के बताए रास्ते पर चलें और उनके दिए मूलमंत्र शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो को अपनाएंगे। तंवर ने कहा कि उनकी राजनैतिक रूप से व्यक्तिगत तृप्ति हो चुकी है, आगे अगर उनकी कलम में ताकत आती है तो वे उसका प्रयोग किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए करेंगे। सम्मेलन में बोलते हुए पूर्व आईजी डॉ. दलबीर भारती ने कहा कि देश और प्रदेश की सरकारें वंचित समाज को मिले संवैधानिक आरक्षण को प्रभावहीन बना रही हैं क्योंकि आरक्षण के संबंध में माननीय कोर्ट का जो निर्णय वंचितों के पक्ष में आता है, उस पर एक सोची समझी रणनीति के तहत स्टे करवा दिया जाता है। जो निर्णय आरक्षण को लेकर वंचित वर्ग के खिलाफ होता है, उसे तुरंत ही लागू कर दिया जाता है। दलित समाज के लोग अब अपने साथ हो रहे इस भेदभाव को सहन नहीं करेंगे। उन्होंने दलित समाज के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान करते हुए कहा कि वे अपना समय और संपति का कुछ अशं अंबेडकर मिशन पर खर्च करने की आदत जरूर डालें। इस मौके पर मंगलराम सोलंकी, सुरेश सरोहा, संदीप कुमार, बिजेंद्र, जयपाल रंगा, सज्जन डोक वाल और चंद्रभान सेलवाल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
सम्मेलन में ये रखी मांगें
अनिल कुमार आईएएस कमेटी की सिफारिश तुरंत प्रभाव से लागू की जाए, बैकलॉग को तुरंत प्रभाव से भरा जाए और बैकलॉग भरे के लिए एससी भर्ती बोर्ड बनाया जाए। हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग को प्रभावशाली बनाया जाए। कर्मचारी एवं अधिकारी की वरिष्ठता सूचि का निर्धारण रोस्टर प्रणाली के अनुसार किया जाए। सफाई कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर 25 लाख रुपये मुआवजा व पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। ठेका प्रथा को बंद करके नियमित भर्ती की जाए। मजदूरी के दौरान व्यक्ति की मृत्यु होने पर सरकार द्वारा 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।