अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
झूठे दिखावे के लिए उधारी उठाकर जीवन व्यापान करने वाले एक परिवार पर आधारित नाटक का शनिवार रात को दीवान बालकृष्ण रंगशाला कलाकारों ने मंचन किया। पटियाला के सार्थक ग्रुप द्वारा प्रस्तुत किए गए उधारा पति नाटक के मंचन ने दर्शकों का मन को मोह लिया। इसमें डॉ. लक्खी लहरी के निर्देशन में उधारा पति नाटक में कई पंजाबी फिल्मों के कलाकारों ने अपनी विधा का लोहा मनवाया। नाटक का शुभारंभ जींद सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक अश्वनी मलिक ने किया। नाटक में पंजाबी भाषा पर आधारित रहा फिर भी दर्शकों ने इसका खूब लुत्फ उठाया। नाटक में निदेशक लक्खी लहरी ने ऐसे परिवारों की व्यवहारिकता का चित्रण किया जो अपने झूठे दिखावे को लेकर उधारी चीजें लेना पसंद करते हैं।
अपने सामर्थ्य से अधिक साधन संपन्न होने का दिखावा करना ऐसे परिवारों के लिए आम बात है। यहां तक कि अगर घर में साधन संपन्न होने का दिखावा करना पड़ा तो पति को ही बावर्ची बना दिया और असली पति की जगह उधारा पति लेकर साधन संपन्न होने का ड्रामा रचा गया। नाटक में पात्रों ने अपने अभिनय के साथ पूरा न्याय किया और एक असली पति जो बावर्ची बन जाता है, उसकी भूमिका भी परिवार के दिखावे में बेजोड़ रही। नाटक में व्यवहारिकता सामने आ जाती है।
नाटक में बाल मजदूरी पर भी मार्मिक कटाक्ष किए गए। इसके अलावा आज बेटियां किसी भी मामले में बेटों से पीछे नहीं है, इसका चित्रण भी सराहनीय रहा। एमडी शुगर मिल अश्वनी मलिक ने कहा कि नाट्य एक ऐसी विधा है जिसमें कलाकार अपनी प्रतिभा के बल पर घटनाओं को साक्षात कर देता है। ऐसे दृश्य मनुष्य के मानस पटल पर चीर स्थाई प्रभाव छोड़ते है। खासकर किसी भी सामाजिक बुराई पर किया गया चित्रण लोगों पर अच्छा प्रभाव छोड़ता है। उन्होंने कलाकारों द्वारा नाटक में दिखाए गए दृश्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और महिला सशक्तिकरण, लिंगानुपात में सुधार, बाल मजदूरी जैसे बिंदुओं पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए दृश्यों की सराहना की। उन्होंने जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी सूबे सिंह व रंगकर्मी डॉ. पवन आर्य व डॉ. हनीफ खान के प्रयासों की भी सराहना की जो ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए व्यवस्था करते हैं।