पानी निकालने के लिए बढ़ाई जाएगी पंपों की क्षमता
अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। जलभराव को लेकर एफसीआर (फाइनेंस कमीश्नर इन रेवन्यू) केशनी आनंद अरोड़ा शामलो कलां व करेला पंप हाउस का दौरा किया और किसानों की समस्याएं सुनीं। अरोड़ा ने जलभराव के कारण खराब हुई फसलों की तुरंत गिरदावरी करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि पंप हाउस की क्षमता 120 क्यूसिक पर सेकेंड से बढ़ाकर 500 क्यूसिक की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों को मसौदा बनाने के लिए कहा। इस अवसर पर उनके साथ एफसी अनुराग रिस्तोगी, डीसी अमित खत्री, पुलिस अधीक्षक अरुण नेहरा,भावड़ा के चीफ इंजीनियर फूल सिंह नेन, एसडीएम विरेंद्र सहरावत, जुलाना तहसीलदार शिव कुमार भाजपा प्रत्याशी रहे संजीव बुआना व जुलाना थाना प्रभारी भी मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने एफसीआर को बताया कि ड्रेन की सफाई हर वर्ष सिर्फ कागजों में ही होती है हकीकत में नहीं। जहां पर अधिकारी आते-जाते रहते हैं, जैसे सड़क के आसपास व मेन रास्तों के पास सफाई की जाती है। बाकी की जगह बिना सफाई के ड्रेन को छोड़ दिया जाता है। ड्रेन का लेवल भी ठीक नहीं है। जिसके कारण पानी खेतों में भर जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि ड्रेन की क्षमता कम होने के कारण हर वर्ष यहां पर हजारों एकड़ में फसल डूबती हैं और खराब हो जाती हैं। 24 घंटों की बिजली सप्लाई भी पंप हाउस को तभी मिलती है जब सबकुछ जलमग्न हो जाता है। ड्रेन में सफीदों क्षेत्र तक पानी आती है। 20 के करीब ड्रेनों का पानी भी इसी में छोड़ा जाता है। पंप की पानी निकलने की क्षमता केवल 120 क्यूसिक पर सेकेंड है जो बहुत की कम है। ग्रामीणों ने ड्रेन के किनारे बड़े करने की मांग भी एफसीआर से की।
सरपंच के पति कृष्ण मलिक ने कहा कि उनके हजारों रुपये खर्च कर उगाई गई फसल हर वर्ष पानी फिर जाता है। फसल खराब होने से उनकी वित्तीय स्थिति काफी खराब हो जाती है। ग्रामीणों की बात को सुनकर एफसीआर ने तुरंत प्रभाव से खराब फसलों की गिरदावरी करने व पंप की क्षमता बढ़ाने का आश्वासन दिया। इसके अलावा खेतों में पानी निकासी का स्थायी प्रबंध किया जाएगा।
पानी आता है सफीदों एरिया सहित 20 ड्रेनों का, पंप हाउस की क्षमता केवल 120 क्यूसिक
शामलो कलां-पडाना ड्रेन में पानी की क्षमता 285 क्यूसिक है। खेतों में जमा बरसात का पानी अलग से। शामलो कलां में सुंदर ब्रांच नहर पर बने पंप हाउस पर पानी निकासी की क्षमता केवल 120 क्यूसिक है। इस ड्रेन में सफीदों क्षेत्र तक का पानी आता है। क रीब 20 सहायक ड्रेनों का पानी भी शामलो कलां गांव में ही जमा होता है। एक सप्ताह से ज्यादा समय जलभराव को हो चुका है, मगर अब भी पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। खेतों में जलस्तर बढ़ा है जिसके चलते किसानों को उनकी फसल टायर की डीप पर चारपाई बांधकर कटाई करनी पड़ रही है। पानी नहीं निकलने से किसानों में प्रशासन के प्रति रोष पनप रहा है। शामलो कलां-पडाना ड्रेन हर वर्ष किसानों के सपने को चकनाचूर कर देती है। जलभराव के समय राजनेता यहां आते हैं और केवल आशभ्वासन देकर लौट जाते हैं। अधिकारियों को किसानों की याद तब आती है जब जलभराव हो जाता है और पानी से हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो जाती है। मगर पानी का स्थाई समाधान कोई नहीं कर रहा है। शामलो कलां-पड़ाना ड्रेन का निर्माण 1987 में हुआ था। तब इसका एरिया काफी छोटा था। उप-ड्रेन भी इस ड्रेन से नहीं जोड़ी गई थी। समय बीतता गया और ड्रेन का एरिया सफीदों क्षेत्र तक पहुंच गया जिसमें अब 60-70 गांव भी इससे जुड़ चुके हैं। इसके अलावा 20 ड्रेनों का पानी भी इसी ड्रेनों में छोड़ दिया गया। मगर सुंदर ब्रांच नहर पर बने पंप हाउस की क्षमता नहीं बढ़ाई गई जो आज किसानों पर भारी पड़ रही है। थोड़ी सी बरसात होते ही यह ड्रेन ओवरफ्लो हो जाती है और किसानों की फसलों को तबाह कर देती है।
शामलो कलां गांव में हर वर्ष पानी से हजारों एकड़ फसल डूब जाती है। ड्रेन का एरिया व इसमें आने वाले बरसात के पानी को देखकर पंप हाउस की क्षमता काफी कम है। किसानों को खराब फसल का मुआवजा, ड्रेन की क्षमता 500 क्यूसिक व ड्रेनों के किनारे ऊंचे करने की मांग एफसीआर से की गई है।
स्नेहलत्ता, सरपंच शामलो कलां।