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इनेलो के असफल बंद के बाद कांग्रेस की अग्नि परीक्षा आज

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बंद में समर्थन की अपील करने पहुंचे नेताओं को सुननी पड़ी खरी-खरी
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शनिवार को इनेलो के हरियाणा बंद के असफल होने के बाद अब सोमवार को होने वाले कांग्रेस के भारत बंद के जींद में सफल रहने के बहुत कम आसार नजर आ रहे हैं। प्रतिदिन किसी न किसी बहाने बाजार बंद करवाने को लेकर दुकानदार खासे नाराज दिखाई दे रहे हैं। बंद को सफल बनाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रविवार को बाजार में जाकर लोगों से सोमवार को दुकानें बंद रखने की अपील की। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कई दुकानदारों की खरी-खरी भी सुननी पड़ी। गौर करने की बात यह भी है कि पिछले एक महीने में डीजल और पेट्रोल के दामों में धीरे-धीरे पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। इस कारण लोगों में गुस्सा है। इसी गुस्से के कारण कांग्रेस के बंद को समर्थन भी मिल सकता है।
कांग्रेस का सोमवार को होने वाला भारत बंद सफल रहे, इसके लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रविवार को ही दुकानों पर जाकर दुकानदारों से बंद में भाग लेने की अपील की। इस दौरान कई दुकानदारों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि हरदिन कोई न कोई पार्टी किसी न किसी बहाने दुकानें बंद करवाने आ जाती है। इससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। कुछ दुकानदारों ने कहा कि किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता को किसी दुकानदार से कोई लेना-देना नहीं है। वे केवल अपनी राजनीति को चमकाने के लिए दुकानें बंद करवाने आ जाते हैं। कोई भी पार्टी यह नहीं सोचती कि दुकानदारों का भला किस प्रकार से हो सकता है, लेकिन उनका धंधा ठप करवाने के लिए जरूर आ जाते हैं। इसी बीच कांग्रेस के कई नेताओं ने अलग-अलग टोलियां बनाकर शहर के दुकानदारों की नब्ज टटोलने की कोशिश की। हालांकि
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कांग्रेस कार्यकर्ता पूरा समर्थन मिलने की बात कह रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उनको यह सता रहा है कि बंद सफल होगा या नहीं। जिस प्रकार से इनेलो का बंद असफल रहा, उससे सबक लेते हुए कांग्रेस हाईकमान से यह साफ कह दिया है कि जिस भी कस्बे या शहर में बंद असफल रहेगा उसके नेता इसके लिए सीधे जिम्मेदार होंगे। इस कारण कांग्रेस नेता दुकान-दुकान जाकर दुकानदारों से महंगाई व पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों की दुहाई देकर उनका समर्थन मांग रहे हैं, लेकिन इसमें वे कितने सफल होते हैं यह तो बंद के बाद ही पता चलेगा।
तीन जुलाई से नौ सितंबर तक पांच रुपये बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम
तीन जुलाई को पेट्रोल के दाम 75.83 रुपये थे, जबकि डीजल के दाम 68.02, जो नौ सितंबर को 80.82 रुपये व 73.33 रुपये पहुंच गए हैं। इससे बीच-बीच में एकाध बार पेट्रोल व डीजल के दामों में मामूली गिरावट भी हुई, लेकिन उनमें बढ़ोत्तरी लगातार जारी रही। बढ़ोत्तरी भी ऐसी कि 10, 20 और 30 पैसे हुई। इनमें कभी भी एक रुपया या दो रुपये बढ़ोत्तरी नहीं हुई। अब पेट्रोल के दाम 80 रुपये प्रति लीटर से ऊपर जाने के बाद जनता में हायतौबा जरूर मची है, लेकिन इनके रेट बढ़ने से वाहनों के प्रयोग में कोई कमी दिखाई नहीं दे रही है।
तारीख पेट्रोल डीजल
3 जुलाई 75.83 68.02
6 जुलाई 76.12 68.30
10 जुलाई 76.80 68.87
17 जुलाई 77.22 69.27
7 अगस्त 77.41 69.20
10 अगस्त 77.48 69.27
17 अगस्त 77.54 69.56
24 अगस्त 78.00 69.88
31 अगस्त 78.85 70.92
1 सितंबर 79.01 71.13
2 सितंबर 79.17 71.47
3 सितंबर 79.47 71.86
4 सितंबर 79.63 72.05
5 सितंबर 79.63 72.05
6 सितंबर 79.83 72.26
7 सितंबर 80.31 72.78
8 सितंबर 80.70 73.23
9 सितंबर 80.82 73.33
दुकानदारी हो रही है प्रभावित
कभी इनेलो तो कभी कांग्रेस कार्यकर्ता बाजार में दुकानों को बंद करवा रहे हैं। इससे दुकानदारी काफी प्रभावित रही है। व्यापारियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन से अनुरोध है कि व्यापारियों के साथ जबरदस्ती करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाए।
कुलदीप गुप्ता, व्यापारी।
लगातार पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ रहे
लगातार पेट्रोल व डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे घर का भी बजट गड़बड़ा गया है। रसोई का गैस सिलिंडर भी महंगा हो गया है। सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द पेट्रोल, डीजल व सिलिंडर के दाम कम किए जाएं।
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सिकंदर मलिक, उपभोक्ता।
आसमान छू रही महंगाई
पेट्रोल व डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। आम आदमी के पहुंच से काफी दूर होता जा रहा है। सरकार एक तरफ तो कह रही है कि अच्छे दिन आएंगे। सब लोग जानना चाहते हैं कि कब आएंगे अच्छे दिन। घर का रसोई का बजट की खराब हो गया है।
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