मुसीबत से कम नहीं सरकारी रेट पर सरसों बेचना
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिले में सरसों खरीद के प्रदेश सरकार के नियमानुसार दो खरीद केंद्र हैं। इन दोनों खरीद केंद्रों पर किसानों को सरसों बेचने के लिए सरसों को उगाने से भी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए एक तो सरकार के सरसों बेचने के नए नियम में दस्तावेजों को पूरा करना बहुत कठिन कार्य है तो दूसरा इसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही उनके सामने परेशानी खड़ी कर रही है। इस कार्य में किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी वेरिफिकेशन के लिए हो रही है।
जिले की दोनों मंडियों में सरसों को खरीदने का काम 28 मार्च से शुरू कर दिया गया है। अब इस खरीद प्रक्रिया को बुधवार तक सात दिन बीत चुके हैं। लेकिन अब तक किसानों को सरसों बेचने के लिए मिलने वाला गेट पास ही जी का जंजाल बना हुआ है। इस कार्य में पटवारी लापरवाही कर रहे हैं। इस वेरिफिकेशन के लिए किसानों को एक बार तो मंडी में सरसों डालने के लिए सरकारी दुकान पर आना पड़ता है। इसके बाद तहसील कार्यालय में लगभग तीन से चार किलोमीटर दूर जाकर सरसों बेचने के लिए दस्तावेजों की वेरिफिकेशन करवानी पड़ रही है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए किसानों को लगभग दो घंटे का समय ज्यादा लगता है।
एक सप्ताह में हुई 800 क्विंटल सरसों की खरीद
सरसों खरीद के कार्य को शुरू हुए बुधवार तक एक सप्ताह बीत चुका है। अब तक जींद और उचाना मंडी में लगभग 800 क्विंटल सरसों की खरीद हुई है। इसमें जींद की मंडी में 500 और उचाना मंडी में 300 क्विंटल खरीदी गई है।
लगाई गईं शर्तों से हो रही परेशानी
सरसों बेचने के लिए किसान को एक साथ दो दुकानों पर जाना पड़ रहा है। इसमें एक तो सरकारी दुकान पर दूसरा निजी दुकान पर। सरकारी पर कुछ सही दाम मिल रहा है जबकि प्राइवेट वालों को 3500 रुपये प्रति क्विंटल में ही सरसों को बेचना पड़ रहा है। इसमें सरकार का नियम आड़े आ रहा है कि एक किसान से प्रति एकड़ साढ़े छह क्विंटल ही सरसों खरीदी जाएगी। किसान की प्रति एकड़ सरसों की पैदावार नौ से दस क्विंटल होती है। इसमें किसान को साढ़े छह क्विंटल तो सरकारी दुकान और बची को निजी दुकानों पर बेचना पड़ रहा है।
-किसान करतार
सरसों बेचने के लिए दो लोगों को आना पड़ता है मंडी
सरकार की खरीद प्रक्रिया के नियम और पटवारियों द्वारा वेरिफिकेशन के नाम पर होने वाली परेशानी के समाधान के लिए सरसों बेचने के लिए घर से एक साथ दो व्यक्तियों को आना पड़ रहा है। इसमें एक तो सरसों को उतरवाने के लिए व अपने दस्तावेजों की जांच के लिए। साथ ही तहसील कार्यालय में जाकर वेरिफिकेशन करवाने के लिए। इस प्रक्रिया में घंटों का समय लगता है। इतना लंबा इंतजार किराए पर आने वाले वाहनों के मालिक नहीं करते। सरसों बेचना बेहद मुश्किल कार्य है। पटवारी गिरदावरी के नाम पर 100 रुपये लेते हैं।
-किसान राजबीर,
सरकार के नियमों पर जारी खरीद
सरकार ने जिन नियमों को सरसों खरीद में लागू किया है। उन को ध्यान में रखते हुए सरसों की खरीद की जा रही है। इसमें किसानों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
-रोशनलाल, हैफेड मैनेजर जींद।
अलेवा का महेंद्र हुआ कर्मचारियों की लापरवाही का शिकार
पिछले चार दिन से मंडी में सरसों लेकर आया अलेवा का महेंद्र कभी मार्केट कमेटी तो कभी कृषि विभाग और कभी बैंक के चक्कर काट रहा है। इसने जब पंजीकरण करवाया था तो बैंक खाते की सही कापी दी थी, लेकिन जो बैंक खाता पंजीकरण में दर्ज हुआ है वह इनका नहीं है। दूसरे गांव खांडा के किसी किसान का है। महेंद्र ने कहा कि पंजीकरण करने वाले कर्मचारियों की लापरवाही का वह शिकार हुआ है। अब इसका समाधान करने के लिए कोई अधिकारी आगे नहीं आ रहा। अगर उन्होंने बेची गई सरसों का बिल कटवाया तो उसकी सरसों के पैसे किसी और के खाते में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि वह चार दिन से इस मामले के समाधान के लिए चक्कर काट रहा है। उन्होंने बताया कि फर्द निकलवाने के लिए पटवारी ने 250 रुपये और गिरदावरी के 200 रुपये उनसे लिए हैं। अब सरसों बेचकर पैसे लेने का समय आया तो बैंक खाता किसी और का दर्ज कर दिया।
शिकायत भेजी है मुख्यालय को समाधान करवाया जाएगा
किसान का बैंक खाता गलत चढ़ा हुआ है। इसको ठीक करवाने के लिए मुख्यालय को अवगत करवाया गया है। सरसों के पंजीकरण की जो साइट चल रही थी वह अब बंद है। इसमें बैंक खाता बदलवाने के लिए बात कर ली गई है। किसान की समस्या का समाधान करवाया जाएगा।
पवन चोपड़ा मार्केट कमेटी सचिव